Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

geet geeta ka gayan kar govind me by dr hare krishna

गीत गीता का गायन कर गोविंद में,जीवन दर्शन दर्शाया है,कुरुक्षेत्र का नाम है केवलअंतर्द्वंद हमारा है। ।। मैं अकिंचन भाव …


गीत

geet geeta ka gayan kar govind me by dr hare krishna

गीता का गायन कर गोविंद में,
जीवन दर्शन दर्शाया है,
कुरुक्षेत्र का नाम है केवल
अंतर्द्वंद हमारा है। ।।

मैं अकिंचन भाव विहव्ल ,
स्मृति पट पर लिख रहा हूं ,
दुखद काल अग्नि सी ज्वाला
जलकर भी मैं मिटा रहा हूं ।।

जितनी परीक्षा देनी होगी,
हर अंको को प्राप्त करूंगा ।
जितना प्रतिशत देना चाहे
दुख विपदा मुझको देना। ।।

घबराने की बात कहां है,
पीड़ा से भी बहुत प्रेम है,
जीवन की परिभाषा पीड़ा
शुभकामना बिल्कुल कम है ।

मिलजुल कर हम वांटा करते,
सुख दुख के हम सभी घड़ी को,
अब भी उसका ख्याल करेंगे ,
क्या रखा है जीवन में। ?

बड़ी-बड़ी बातें जब होती,
जीवन की अमराई में।
तुमको तो हम सदा मानते
आये अपने जीवन में ।।

क्या खोया क्या पाया अब तक?
गणना करना भूल गया हूं,
सबसे मीठा जो था मेरा
वही गया है दूर गगन में। ।।

ढूंढ रही है मेरी आंखें,
ना जाने क्यों नील गगन में,
हाथ सदा उठ जाता हूं ऊपर,
मानो ईश्वर वही दिखा हो ।।

जीवन का यह कैसा क्रम है,
मांगा करते सुख-दुख उससे,
बांटने की तो बात नहीं है
मांगना कितना सहज सरल है ।।

दे दे साकी मृदु जल अपना,
मेरे पास तो खारा जल है ।
स्वाद नहीं इसमें कम है ,
बड़ी कठिन से पाया इसको ।।

अरे परीक्षा बहुत कठिन है,
उत्तीर्णता का अंक नही है,
बैठा बैठा हर प्रश्नों को,
फिर भी हल करता आया हूं
बहुत कृपा है मुझ पर तेरी,,,,,,,,,,।

डॉ हरे कृष्ण मिश्र


Related Posts

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

अंदाजा-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

अंदाजा! ठहरा हुआ दरिया होता है बहुत गहरा ,मुस्कुराहट के पीछे भी हे एक खामोश चेहरा,किसी भी हस्ती को अंदाजे

Leave a Comment