Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

geet daduron tum chup raho ab by shivam

– गीत दादुरों तुम चुप रहो अब ऐ किनारों, इन हिलोरों को तुम्हें सहना पड़ेगा।जिंदगी दिन- रात है, दिन रात …


– गीत
दादुरों तुम चुप रहो अब

ऐ किनारों, इन हिलोरों को तुम्हें सहना पड़ेगा।
जिंदगी दिन- रात है, दिन रात में रहना पड़ेगा।
उल्लुओं क्यों डर रहे हो, दिन ढलेगा रात होगी।
दादुरों तुम चुप रहो, अब जल्द ही बरसात होगी।

है समय प्रतिकूल तो क्या?
जान मैं ले लूं घड़ी की।
जुर्म जब हमने किए तो,
क्या खता है हथकड़ी की?
दिल को मत बोझिल करो, अब जल्द ही मुलक़ात होगी।
दादुरों तुम चुप रहो अब…..

आज दुनिया में वबा के,
सख़्त पहरे हो रहे हैं।
घाव जो गहरे थे वो अब,
और गहरे हो रहे हैं।
पर न तुम चिंतन करो अब, रब से मेरी बात होगी।
दादुरों तुम चुप रहो अब…..

जिंदगी की चाह को तुम,
अश्रुओं में मत बहाना।
रिक्त पोखर दिल के भरता,
आएगा सावन सुहाना।
लौटती मुस्कान अब हर, द्वार पर तैनात होगी।
दादुरों तुम चुप रहो अब…..

✍🏻कवि – शिवम् “सांवरा”
लखीमपुर खीरी [उ०प्र०]


Related Posts

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू-सतीश सम्यक

February 7, 2022

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू रात के सफर मेंजयपुर से नोहर तकआने वाली बसके अंन्दर बैठा था मैं। लगभग भागपाटी

चंद्रमा, चांद, शशि!

February 7, 2022

चंद्रमा, चांद, शशि! सूर्य के बाद सबसे चमकीला ग्रह,सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह,रात्रि को शीतलता प्रदान करता,यह चंद्रमा, चंद्र, शशि के

पृथ्वी बोल पड़ी!

February 7, 2022

 पृथ्वी बोल पड़ी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह, जहां जीव जंतु का जीवन है संभव, निवास करती है

क्या गवायां हैं आज

February 7, 2022

क्या गवायां हैं आज हर करम अपना करेंगे ए वतन तेरे लिएकहने वाली वह आवाज जो शांत हो गई हैंभर

विश्व प्रसिद्ध भारत के अनमोल संस्कार

February 7, 2022

कविताविश्व प्रसिद्ध भारत के अनमोल संस्कार विश्व प्रसिद्ध भारतीय संस्कार अनमोल मोती है रोज़ माता-पिता चरण स्पर्श से शुरुआत होती

दिल्ली शहर-डॉ. माध्वी बोरसे

February 7, 2022

दिल्ली शहर! भारतीय गणराज्य की राजधानी,इसका इतिहास है गौरवशाली,एक विशेष केंद्र शासित प्रदेश,महाभारत काल से इसका उल्लेख रहा विशेष! देश

Leave a Comment