Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Geet aradhya tumhi aradhna meri by hare krishna mishra

गीत  आराध्य तुम्ही, आराधना मेरी,साध्य तुम्ही, साधना भी मेरी । स्वर्गलोक से चल कर आयी ।।कल कल,छल छल गंगा जैसी, …


गीत 

Geet aradhya tumhi aradhna meri by hare krishna mishra

आराध्य तुम्ही, आराधना मेरी,
साध्य तुम्ही, साधना भी मेरी ।

स्वर्गलोक से चल कर आयी ।।
कल कल,छल छल गंगा जैसी,

जीवन के सुंदर भूतल में ,
बहती आई निर्झर बनकर,
शाम सवेरे मिलजुल कर ,
गाते रहते छंद विरल। ।।

लुप्त हो गई ध्वनि तुम्हारी
श्रवण करने को आतुर मन ,
तन मन का तो सुध नहीं है
प्यारे छंद हो गए विकल ।।

काव्य और कामना तुम्हारी ,
मंगलमय गीतों बन आयी ,
रही अधूरी साधना मेरी ,
जीवन का साध्य बनी मेरी। ।।

कठिन परीक्षा कब तक होगी ,
अध्ययन मेरी रही अधूरी ,
लेखन अब अवरुद्ध हुआ है ,
लिखना बिल्कुल भूल गया हूं। ।।

गाने को अब मन है आतुर ,
बिरह गीत को कैसे गाऊं ,
काव्य अधूरे रह गए मेरे ,
साध्य हमारे केवल तुम हो। ।।

स्मृति तुम्हारी शेष रही है
मिटे नहीं जीवन से।
प्राप्त हुआ है इतना मुझको,
कहां मिला है किसको। ?

जिसने मुझ पर उपकार किया है,
पीड़ा का अनुदान दिया है
जीवन को जीने का इससे,
नहीं बड़ा उपहार है कोई। ।।

सीता की हो गई अग्निपरीक्षा,
अब मेरी परीक्षा बाकी है,
सीता और राम का आना
धरती का मनोहारी है ।।

तथास्तु,,,,,, डॉ हरे कृष्ण मिश्र


Related Posts

संविधान, भारत का परिचय-डॉ. माध्वी बोरसे

November 27, 2021

 संविधान, भारत का परिचय! भारत ने 1949 मैं संविधान को अपनाया, संविधान दिवस राष्ट्रीय कानून के रूप में मनाया, डॉ.

मौत से इतना डर क्यों?- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 27, 2021

 मौत से इतना डर क्यों? अब तक ज्यादातर मौत को  बताया जाता रहा है भयानक और जीवन को सुंदर, लेकिन

लोकतंत्र पर उल्लू हंसता- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

November 27, 2021

 लोकतंत्र पर उल्लू हंसता कोई चैनल खोल के देखो, बड़े-बड़े दिग्गज लगते हैं, मानो उनका ज्ञान आंकना, जनता को बहुत

प्रधानमंत्री ( एक व्यक्तित्व )-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

November 27, 2021

 प्रधानमंत्री  ( एक व्यक्तित्व ) मोदी जी पर कविता लिखना, बहुत सरल है सरलता उनकी, बाल काल से कर्मयोगी बन

कैसे पल्लवित होंगी प्रतिभाएं?- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 27, 2021

 कैसे पल्लवित होंगी प्रतिभाएं? पलायन करती हैं यहां से प्रतिभाएं, क्योंकि उनको सहेजने, प्रोत्साहित व सम्मानित करने के स्थान पर

खुद से ना दूर करो- अंकुर सिंह

November 24, 2021

 *खुद से ना दूर करो* रूठना हक तुम्हारा, मानना फर्ज हमारा।  माफ कर दो अबकी, बिन तुम्हारे मैं हारा।। तुम

Leave a Comment