Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

gazal tulsi by pradeep shrivastav

ग़ज़ल तुलसी  तुलसी,पीपल तेरे आँगन में लगाना है मुझे ।अबकी इस तरहा मुहब्बत को निभाना है मुझे।। अब न आँखों …


ग़ज़ल तुलसी 

gazal tulsi by pradeep shrivastav

तुलसी,पीपल तेरे आँगन में लगाना है मुझे ।
अबकी इस तरहा मुहब्बत को निभाना है मुझे।।

अब न आँखों में नमीं है न शहर में पानी ,
धार गंगा की तेरे गाँव में लाना है मुझे ।।

चाँद रख्खा है छुपाकर के कुछ अमीरों ने ,
रोशनी के लिए घर ख़ुद का जलाना है मुझे ।।

मर गई भूख ,तवे ठंडे आस इक बाकी ,
उनकी वापस वही उम्मीद को लाना है मुझे।।

बेबज़ह शोर है गलियों में कैसा है क्यों है,
क्या हक़ीक़त है पता इसका चलाना है मुझे।।

प्रदीप श्रीवास्तव
करैरा जिला शिवपुरी मध्यप्रदेश


Related Posts

स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है

March 5, 2023

भावनानी के भाव  स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है नवाचार में तीव्र विकास करने समृद्ध करने भाषाई अड़चनों को

हे राम!! | Hey ram

March 5, 2023

हे राम!! राम तुम क्यूं ना बन सके प्रैक्टिकल,कि जब मेघनाद का तीर लगा लखन को,क्यों तुमने द्रवित किया था

द्वारिका में बस जाओ

March 5, 2023

 द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे,

सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra

March 5, 2023

 सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर

मेरी दादी माँ| meri dadi maa

March 5, 2023

 मेरी दादी माँ आज की शाम मेरी दादी के नाम कर रहे सब आज तुम्हारी बातें इकट्ठा हो घर के

नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

March 4, 2023

 भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो  अटके काम बनाना है तो 

PreviousNext

Leave a Comment