Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

gazal tulsi by pradeep shrivastav

ग़ज़ल तुलसी  तुलसी,पीपल तेरे आँगन में लगाना है मुझे ।अबकी इस तरहा मुहब्बत को निभाना है मुझे।। अब न आँखों …


ग़ज़ल तुलसी 

gazal tulsi by pradeep shrivastav

तुलसी,पीपल तेरे आँगन में लगाना है मुझे ।
अबकी इस तरहा मुहब्बत को निभाना है मुझे।।

अब न आँखों में नमीं है न शहर में पानी ,
धार गंगा की तेरे गाँव में लाना है मुझे ।।

चाँद रख्खा है छुपाकर के कुछ अमीरों ने ,
रोशनी के लिए घर ख़ुद का जलाना है मुझे ।।

मर गई भूख ,तवे ठंडे आस इक बाकी ,
उनकी वापस वही उम्मीद को लाना है मुझे।।

बेबज़ह शोर है गलियों में कैसा है क्यों है,
क्या हक़ीक़त है पता इसका चलाना है मुझे।।

प्रदीप श्रीवास्तव
करैरा जिला शिवपुरी मध्यप्रदेश


Related Posts

माँ का समर्पण- अनीता शर्मा

December 23, 2021

माँ का समर्पण माँ का समर्पण उसे निभाती एक स्त्री । माँ शब्द अपने में सशक्त,सबको माफ कर चुप रहती।

जीवन भी गणित- सुधीर श्रीवास्तव

December 23, 2021

राष्ट्रीय गणित दिवस (22 दिसंबर) पर विशेष जीवन भी गणित हम और हमारे जीवन का हर पल किसी गणित से

प्रणय की धारा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

प्रणय की धारा मन का स्रोत बहुत है गहरा ,मन से निकली प्रणयकी धारा ,मन और धन का खेल निराला,

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं- जितेन्द्र ‘कबीर

December 22, 2021

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं साक्षात् भगवान का रूप मानतेहैं उसे,कुछ ही हैं लेकिन ऐसे,ज्यादातर ‘डाक्टर’ अंधे हुए पड़े हैंदवाई

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

Leave a Comment