Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Gazal – kya karu by kaleem Raza

ग़ज़ल – क्या  करू मै  तुम कहो तो अश्क आंखो से गिराऊं क्या बैठकर मै पास हाले दिल सुनाऊं क्या …


ग़ज़ल – क्या  करू मै 

Gazal - kya karu by kaleem Raza

तुम कहो तो अश्क आंखो से गिराऊं क्या
बैठकर मै पास हाले दिल सुनाऊं क्या करू

आग जो तुमने लगाई थी अभी तक जल रही
जलने दूं इसको बता मै या बुझाऊं क्या करू

आज भी रखा है मैंने जो दिया था तूने खत
कुछ समझ आता नहीं इसको जलाऊ क्या करू

जिंदगी में खूबसूरत दिन गुजारे है उन्हे
याद रखूं लम्हे वो या भूल जाऊ क्या करू

काम आएंगी दवाएं इसको ना मेरे कलीम
है मरीज़ ए इश्क ये क्या खिलाऊ क्या करू

                                                  – कलीम रज़ा
                                                  बछरावां रायबरेली यूपी


Related Posts

Bhedbhav by Anita Sharma

October 7, 2021

 भेद भाव भेद भाव के रंग रूप में बंटा हुआ संसार है। * एक ईश की संतान सभी हैं। मत

Mai shapit hu by komal Mishra koyal

October 7, 2021

 मैं शापित हूँ घुट घुट कर मर जाने को मैं शापित हूँ हर बार जलाए जाने को नहीं कह पाती

Udan by Anita Sharma

October 7, 2021

 “उड़ान” मेरे घर घोंसला बनाकर, पंछी का जोड़ा आया रहने। रोज उसे तिनका-तिनका, लाते देखा करती अक्सर। आज अचानक आवाज़

Nari kitni aatmnirbhar hai by Jitendra Kabir

October 7, 2021

 नारी कितनी आत्मनिर्भर हैं? खुद के कमाए पैसे खर्च करने के लिए भी बहुत बार अपने पति  व घरवालों की

Pratiksha by Anita Sharma

October 7, 2021

 प्रतीक्षा तुम्हारे आने की प्रतीक्षा और बेसब्री, एक-एक दिन गिन-गिनकर कटता है। * उतावलापन और बढ़ती प्रतीक्षा, कितनी बेचैनी कितनी

Jhootha aadambar kyu by Jitendra Kabir

October 7, 2021

 झूठा आडंबर क्यों? जिस इंसान ने अपने दुश्मनों से भी कभी नफरत नहीं की, अपनी तरफ से की जिसने भरसक

Leave a Comment