Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Gazal-azad gazal by ajay prasad

आज़ाद गज़ल मुझें साहित्यकार समझने की आप भूल न करें उबड़-खाबड़,कांटेदार रचनाओं को फूल न कहें। मेरी रचनाएँ बनावट और …


आज़ाद गज़ल

Gazal-azad gazal by ajay prasad


मुझें साहित्यकार समझने की आप भूल न करें
उबड़-खाबड़,कांटेदार रचनाओं को फूल न कहें।
मेरी रचनाएँ बनावट और सजावट से हैं महरूम
कृपया  आलोचना करें मगर  ऊल-जुलूल न कहें ।
हाँ चुभते ज़रूर हैं चंद लोगों  की नज़रों में यारों
हक़ीक़त में हैं नागफनी ,इन्हें आप बबूल न कहें।
कुछ तो बदलाव लाया जाए परंपरागत लेखन में
सदियों से रहा यही है साहित्य का उसूल न कहें ।
बड़े आए अजय तुम साहित्य के सुधारक बनकर
बहुत सह लिया हमनें आपको,अब फ़िज़ूल न कहें 
-अजय प्रसाद


Related Posts

Ab aur na aise satao sanam

February 14, 2021

poem जब से तुझ से  जुड़ा  फूल सा खिल  गया  सूखे  मधुबन में जैसे   कँवल   खिल  गया अकेले  पन  में 

Achhe din

February 8, 2021

 कविताअच्छे दिन बात    महिलाओं      की   सुरक्षा     का       हो या           कुपोषित 

Sach pagli hme tumhi se pyar hai

February 8, 2021

 कविता जब देखता हूं जिधर  देखता हूं  दिख  जाती  हो मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती

Har vade par asha kiya na kro

February 8, 2021

 ग़ज़ल हर   वादे   पर   आशा   किया   ना   करो पराधीन    होकर     जिया      ना     करो लगी है

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

February 8, 2021

 ग़ज़ल पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना हैरोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है समय के

Zindagi me mere aana tera

February 6, 2021

 ग़ज़ल  ज़िन्दगी में मेरे आना तेरा प्यार हर पल मेरा, निभाना तेरा भूल जाऊं मैं कैसे तुझको सनम प्यार गंगा

Leave a Comment