ग़ज़ल
आजकल शहर में एक फ़साना सरे आम हो गया,
जब से यार मेरा सियासी लोगो का गुलाम हो गया
जमीर बेच दिया उसने थोड़ी सी दौलत की खातिर,
यह क्या हो रहा आज ज़माने में अख़बार बोलता
इक ईमानदार अफसर परेशान है घर चलाने में
सियासत की गणित मानवता ख़त्म कर रही अब,
ग़ज़ल आजकल शहर में एक फ़साना सरे आम हो गया, जब से यार मेरा सियासी लोगो का गुलाम हो गया …
आजकल शहर में एक फ़साना सरे आम हो गया,
जब से यार मेरा सियासी लोगो का गुलाम हो गया
August 3, 2021
” मेरा बेटा हैप्पी” मेरा बेटा मिट्टी खाता , बहुत बड़ा दुर्गुण है यह। हर समय शिकायत सुन
August 3, 2021
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August 3, 2021
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August 3, 2021
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July 31, 2021
तुम्हारे रास्ते से ज़िन्दगी आबाद बाबूजी। तुम्हारे रास्ते से ज़िन्दगी आबाद बाबूजी।इसी दर्जा मिरी करते रहें इमदाद बाबूजी।। मिरे जीवन