Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Gaumata by Sudhir Srivastava

 गौमाता आज गोमाष्टमी है, आज हम गौमाता की  पूजा, सेवा करते हैं, शायद औपचारिकता निभाते हैं। क्योंकि हम गायों को …


 गौमाता

Gaumata by Sudhir Srivastava

आज गोमाष्टमी है,

आज हम गौमाता की 

पूजा, सेवा करते हैं,

शायद औपचारिकता निभाते हैं।

क्योंकि

हम गायों को माँ मानते हैं

उनकी पूजा करते हैं,

उनके अमृतरूपी दूध का पान करते हैं,

उनके मूत्र, गोबर का 

बहुतेरा प्रयोग करते हैं,

पूजा पाठ में गौ के दूध का ही नहीं

गोबर का भी उपयोग करते हैं।

गौमाता में देवी देवताओं का 

सदा वास होता है,

पशुधनों में गौमाता का

खास स्थान होता है।

पर समय की गति देखिये

कि हम श्रद्धा तो खूब दिखाते हैं

गाय को माता बताते है,

पर गौ पालन से कोसों दूर भागते हैं।

विचार कीजिए हम कहाँ जा रहे हैं

माँ भी कहते हैं और उपेक्षा भी करते हैं,

अहम और दिखावे में पड़कर

हम गौसेवा से दूर भागते हैं।

और तो और 

इतने पाषाण हो गये हैं हम

कि गौवंश काटे जाते हैं

उनके माँस का भक्षण

जंगली जानवरों की तरह हो रहे हैं

हिंंदू, मुसलमान की बात छोड़िए

जाति धर्म के नाम पर गौमाता को

बलि का बकरा बनाते हैं।

ऐसा लगता है कि अब हम

इंसान कहलाने के लायक नहीं हैं।

माँ तो अपने बच्चों में भेद नहीं करती

फिर हिंंदू मुसलमान के चक्कर में

अपनी गौमाता को क्यों हैं पिसते?

अब भी समय है चेत जायें

गौमाता को अपमानित, उपेक्षित न करें

अपने सिरों पर पाप का बोझ

अब और न ही धरें,

गौमाता को सिर्फ़ दुधारू 

पशु समझने की भूल न करें,

उनकी महत्ता, गरिमा को महसूस करें,

अब और न घमंड करें।

वरना बहुत पछताएंगे

गौमाता की आह नहीं झेल पाएंगे,

तब बस हाथ मलते रह जाएंगे,

सिर्फ़ आँसू बहाएंगे, पछताएंगे

मगर कुछ कर नहीं पायेंगे

गौमाता, गौमाता की बस 

करुण पुकार लगाएंगे।

👉 सुधीर श्रीवास्तव
         गोण्डा, उ.प्र.
      8115285921
© मौलिक, स्वरचित


Related Posts

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

अंदाजा-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

अंदाजा! ठहरा हुआ दरिया होता है बहुत गहरा ,मुस्कुराहट के पीछे भी हे एक खामोश चेहरा,किसी भी हस्ती को अंदाजे

Leave a Comment