Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Ganga kavita by anita sharma jhasi

 गंगा तू कितनी निर्मल है,तू कितनी पावन है। अमृत की धारा है,कि पुण्य फल दाता है। कितनो के माँ पाप …


 गंगा

Ganga kavita by anita sharma jhasi

तू कितनी निर्मल है,तू कितनी पावन है।

अमृत की धारा है,कि पुण्य फल दाता है।

कितनो के माँ पाप धोये,कितनो को तारा है।

तू शीतल धारा है,पालन हारा है माँ गंगे।

मुक्ति जन को देती है,पिण्ड को स्वीकारती।

है प्रताप धार माँ,उतारूँ तेरी आरती।

तट पर तपस्वी का वास है,सुधारते योनि को।

त्रिवेणी का संगम जहाँ रोज तरते सारथी।

शिव की जटा में विराजती,वेग प्रबल चाल है।

कितने खेतों को सींचती,कितनों को तारती।

भागीरथ के तप से ,भागीरथी कहाती है।

जय जय गंगे,जय हो माँ गंगा।

गंतव्य की ओर बढ़ रही,गोमुख से उदगम तेरा।

हे पुण्य निर्मल माँ,धरा को पुण्य आशीष दे।

जय जय जय माँ गंगा,बहुत पुण्य फलदायिनी।

—–अनिता शर्मा झाँसी

——स्वरचित/मौलिक रचना


Related Posts

नारी सब पर भारी हो | Naari par kavita

September 10, 2023

नारी सब पर भारी हो ! नारी हो तुमसब पर भारी होतुम किसी की बेटी बनघर की रौनक बन जाती

नटखट कृष्ण | natkhat krishna

September 6, 2023

नटखट कृष्ण कान्हा, तेरी देख सुंदर छवि प्यारी,मन हुआ विकारों से खाली।मनभावन अखियां तेरी,मोहक मुस्कान है।मोरपंख से सुशोभित मुकुट तेरा,घुंगराले

माँ बूढ़ी हो रही है

August 30, 2023

माँ बूढ़ी हो रही है अबकी मिला हूँ माँ से,मैं वर्षों के अंतराल पर,ध्यान जाता है बूढ़ी माँ,और उसके सफ़ेद

रक्षाबंधन पर कविता

August 30, 2023

 रक्षाबंधन बहन इक भाई के जीवन में रिश्ते कई निभाती है,बन के साया मां की तरह हर विपदा से बचाती

दिकु के झुमके

August 30, 2023

दिकु के झुमके सुनो दिकु….. अनोखे से झुमके तुम्हारेपल पल याद आते है आज भी उनकी झणकार कामेरे कानों में

मां गंगा को शुद्ध करने अनेक मिशन चलाएंगे

August 14, 2023

भावनानी के भाव मां गंगा को शुद्ध करने अनेक मिशन चलाएंगे मां गंगा को शुद्ध करने अनेक मिशन चलाएंगे इन

PreviousNext

Leave a Comment