Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Etana kaphi hai by Jitendra kabir

 इतना काफी है वो कहते हैं कि लिखने से तेरे क्रांति आ जाए इतना महान भी तू लेखक नहीं, मैं …


 इतना काफी है

Etana kaphi hai by Jitendra kabir

वो कहते हैं

कि लिखने से तेरे क्रांति आ जाए

इतना महान भी तू लेखक नहीं,

मैं कहता हूं

कि पढ़कर मुझे अच्छी-बुरी कोई भी प्रतिक्रिया

देने को तेरा दिल मचल जाए

शुरूआत के लिए इतनी चिंगारी काफी है।

वो कहते हैं

कि लिखने से तेरे किसी का 

जीवन बदल जाए

इतना महान भी तू लेखक नहीं,

मैं कहता हूं

कि पढ़कर मुझे बदलाव की बात भी 

मन में तेरे उतर पाए

शुरूआत के लिए इतना प्रभाव काफी है।

वो कहते हैं

कि लिखने से तेरे किसी की

मुश्किलें कम हो जाएं

इतना महान भी तू लेखक नहीं,

मैं कहता हूं

कि पढ़कर मुझे किसी के अंतर्मन को

सांत्वना ही मिल जाए

शुरूआत के लिए इतना जुड़ाव काफी है।

                                     जितेन्द्र ‘कबीर’

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment