Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Ek vyang nasha by Anita Sharma

 एक व्यंग्य नशा सबका मनोरंजन करते अभिनेता पर अपने घर में समय न देते। धन तो खूब कमा लेते पर …


 एक व्यंग्य नशा

Ek vyang nasha by Anita Sharma

सबका मनोरंजन करते अभिनेता

पर अपने घर में समय न देते।

धन तो खूब कमा लेते पर

बच्चों को संस्कार न दे पाते।

नशे के आदी हो रहे सभी

पर इस ओर ध्यान कहाँ?

धन वैभव में दिशा हीन है

चूर सभी मद मदिरा नशे में।

अभिनेता-नेताओं की परवरिश

पोल खोलती जेल कोठरी।

चक्कर कोर्ट में लगा रहे हैं

वकीलों की कतार उतार रहे।

काश अभिनय के साथ साथ

अभिभावक अच्छे बन पाते?

कुछ संस्कार और मर्यादा से

परिवार सफल बना पाते ?

चकाचौंध में डूबकर

अपना परिवार भुला बैठे।

नशे के आदी हो रहे बच्चे

शौकीन सभी दिखावे में।

——अनिता शर्मा झाँसी
——मौलिक रचना


Related Posts

कविता-हार और जीत जितेन्द्र कबीर

June 1, 2021

हार और जीत ‘हार’ भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए ‘निराश’लेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने अंतर्मन

kavita barkha shweta tiwari Mp.

June 1, 2021

बरखा बरखा रानी आओ ना  बूंद बूंद बरसाओ ना तपती धरती का व्याकुल अंतर्मन  क्षुब्ध दुखी सबका जीवन  शीतल स्पर्श

kavita vaqt by anita sharma jhasi

June 1, 2021

वक्त जुबां से आह निकली थी,लबों पे उदासी थी।क्या सोचा था,क्या पाया है,मन में उदासी थी। कभी ईश्वर से नाराजगी

kavita Bebasi by Namita Joshi

May 31, 2021

  बेबसी हर सूं पसरा है सन्नाटा, हर निगाह परेशान क्यूँ है। गुलजा़र था जो मैदान कभी कहकहों से, आज

kavita purane panne by Anita sharma

May 31, 2021

पुराने पन्ने चलो पुराने पन्नों को पलटाये,फिर उन पन्नों को सी लेते हैं।उसमें दबे अरमानो में से ही,कुछ अरमान जीवन्त

kavita shahar by Ajay jha

May 31, 2021

शहर. मैं शहर हूँ बस्तियों की परिधि में बसा मजबूर मजलूम पलायित नि:सरित श्रम स्वेद निर्मित अभिलाषा लिए अतीत का

Leave a Comment