Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Ek aurat ho tum kavita by Rajesh shukla

एक औरत की जिंदगी पर आधारित कविता कविता-एक औरत हो तुम महकती हो तुमबहकती हो तुमदहकती हो तुमसिसकती हो तुम …


एक औरत की जिंदगी पर आधारित कविता

कविता-एक औरत हो तुम

Ek aurat ho tum kavita by Rajesh shukla

महकती हो तुम
बहकती हो तुम
दहकती हो तुम
सिसकती हो तुम ।

एक औरत हो तुम
तुममें हर खूबियां
भूलकर सारे सुख
सारी मजबूरियां ।

घर बनाती हो तुम
चहचहाती हो तुम
गुनगुनाती हो तुम
मुस्कुराती हो तुम !

तुम न हो तो
घर में हो सुनसानपन,
न जलें फिर दीये
न लगे सबका मन !

मां न हो तो
न बेटा, पिता खुश रहें
घर मे हर सुख ,पर
किससे हम बेटी कहें।

घर का ऐनक हो तुम
घर की रौनक हो तुम,
घर का सावन हो तुम
घर का फाल्गुन हो तुम !
 
बस तुम्हीं सार हो
घर का आधार हो,
कुल की शौहरत हो तुम
एक औरत हो तुम !

लेखक राजेश शुक्ला सोहागपुर


Related Posts

आने वाला पल- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

आने वाला पल आने वाला पल तो आकर ही रहेगा, जैसे जाने वाला पल भीभला कब ठहरा है ? क्योंकि

गुरु गोविंद पुकारा है – डॉ इंदु कुमारी

January 13, 2022

गुरु गोविंद पुकारा है तेग बहादुर सिंह ने अपने बेटे को बलिदान दिया झुका नहीं दुश्मन के आगेमौत को भी

व्याकुल अंतर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 13, 2022

व्याकुल अंतर प्रीत निभाती रात गई बित , जोड़ जोड़ कर सपने-अपने,बंद आंखों में मिलन यामिनी ,हुई भोर तो साथ

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक

January 13, 2022

कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित

प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

प्रेरणा कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी मेंउम्मीद की किरण

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

Leave a Comment