Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Dhwaj trivarn hai chhane ko by Arun kumar sukla

 ध्वज त्रिवर्ण है छाने को, है उठी लालिमा पूरब से, नभ केसरिया कर जाने को। यह क्षण है दिग नभमण्डल …


 ध्वज त्रिवर्ण है छाने को,

Dhwaj trivarn hai chhane ko by Arun kumar sukla

है उठी लालिमा पूरब से,
नभ केसरिया कर जाने को।
यह क्षण है दिग नभमण्डल भी,
जय घोषों से दहलाने को । 
विजय दिवस पर शंख फूंक दो ,
 ध्वज त्रिवर्ण है आने को॥…..
 इस भूमी के लाल कई,  

उठी लालिमा पूरब से,

नभ केसरिया कर जाने को। 

यह क्षण है दिग नभमण्डल भी,

जय घोषों से दहलाने को । 

विजय दिवस पर शंख फूंक दो , 

ध्वज त्रिवर्ण है आने को॥…..

 इस भूमी के लाल कई, 

जो जन्में शान बढाने को। 

नहीं गुलामी रोक सकी क्षण,

उस दृढ स्वतन्त्र के भाले को।

सबने हस जान निछावर की, 

निज देह अमर कर जाने को॥

 विजय दिवस पर शंख ……. , 

राष्ट्रगान की अमिट गूंज ,

हर एक कर्ण पड़ जाने दो। 

तम बरबरता हृदि न जकड़े, 

क्रान्ती मसाल जल जाने दो।

 दिग गज पर बल सिंह बनो अब,

शत्रू के रक्त जलाने को॥ विजय दिवस पर शंख फूंक दो….

अरुण कुमार शुक्ल,
जिला सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश


Related Posts

नेताजी – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

नेताजी सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गएभारत माँ के भाल, सजा के गएस्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गएलाल थे

सबसे ख़तरनाक जहर- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

सबसे ख़तरनाक जहर वो बहुत अच्छे से जानते हैंकि जहर की कितनी मात्रा रोज देने सेमर जाती हैं एक इंसान

ऐ चाँद- डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

ऐ चाँद लिख रही तेरी दास्तानशीतलता करते प्रदानदागदार वह कहलाते हैंजीवों के हित आते हैंचाँदनी फिर छिटकाते हैंनिशब्द भरी रातों

भारत माता – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

भारत माता भारत जननी तू हो महानतूने जने हो वीर संतानसिर हिमालय की पायीचरणों को धोता सागर हैशेरों की है

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

January 25, 2022

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम

Leave a Comment