Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Dhanteras by Sudhir Srivastava

 धनतेरस आइए!धनकुबेर के नाम एक दीप जलाते है, कुबेर जी से आशीष पाते हैं। धनतेरस से ही दीवाली पर्व की …


 धनतेरस

Dhanterasby Sudhir Shrivastava

आइए!धनकुबेर के नाम

एक दीप जलाते है,

कुबेर जी से आशीष पाते हैं।

धनतेरस से ही दीवाली पर्व की

शुरुआत होती है।

आज हम धन कुबेर जी को मनाते हैं

धन धान्य से भरपूर होने का

सब वरदान चाहते हैं।

आज इस बार हम सब

अपने साथ साथ

दीन हीन असहायों के लिए भी

धन दौलत सुख माँगते हैं।

हे प्रभु!मुझ पर अपनी कृपा बरसाओ

मगर उससे पहले

उन पर भी कृपा करो,

जो गरीब, लाचार असहाय हैं,

उन्हें भी खुशहाल करो

उनकी बदहाली पर तरस खायो,

जन जन पर अपनी

बहुत कृपा बरसाओ।

बस मेरी इतनी सी विनती है

भूख,बेबसी, लाचारी मिटाओ

मेरी पूजा का बस इतना फल दे दो

हर चेहरे पर मुस्कान और

हर झोली में धन भर दो।

✍ सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा(उ.प्र.)
     8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो – डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो! अगले जनम मोहे नारी ही कीजो,दोबारा मेरे माता-पिता को, प्यारी सी बिटिया ही दीजो,फिर

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म

श्रद्धांजलि-नंदिनी लहेजा

December 10, 2021

श्रद्धांजलि नम हैं हिंदुस्तान आज , जो खोया वीर सपूत।जीवन साथी संग उनके,जाबांज़ वीर भी, क्षति हुई अभूत।इक ज़लज़ला आया

अपना एक घर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

अपना एक घर बहुत आलीशान न भी हो,मामूली-सी छत के नीचे होचाहे साधारण सा एक कमरा,घांस-फूस से बनी झोंपड़ी होअथवा

Leave a Comment