Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Devtavon ke guru brihaspati by Anup Kumar Varma

शीर्षक – ” देवताओं के गुरु बृहस्पति”  जो अंधेरे से उजाले की ओर ले जाए,  वही तो हम सबका गुरु …


शीर्षक –

” देवताओं के गुरु बृहस्पति”

Devtavon ke guru brihaspati by Anup Kumar Varma

 जो अंधेरे से उजाले की ओर ले जाए,

 वही तो हम सबका गुरु कहलाए।

ज्ञान पाकर हम अच्छे नागरिक बन जाए,

गुरु हमको सदा यही बताए।। 

गुरु को हम शीश झुकाए,

अपना जीवन सफल बनाए।

गुरु के बिना न कोई हम ज्ञान पाए,

शिक्षा देकर सद मार्ग पर लाए।।

गुरु की सेवा करते जाए, 

सच्चे सेवक सदा कहाए। ज्ञान की बातें जिसको भाए,

वह ही उत्तम गुरु कहलाए।।

रामचंद्र के गुरु विश्वामित्र  कहाए,

दशरथ के गुरु वशिष्ठ बताए। 

देवताओं के गुरु बृहस्पति भाए,

“अनूप” सब गुरुओं को शीश झुकाए।।

स्वरचित मौलिक एवं अप्रकाशित 

अनूप कुमार वर्मा 

कवि/लेखक/पत्रकार/समाजसेवी


Related Posts

शहीदों के वैलेंटाइन डे- डॉ इंदु कुमारी मधेपुरा बिहार

February 24, 2022

शहीदों के वैलेंटाइन डे। वैलेंटाइन डे तो सब मनाते हैं पर कारवां कुछऐसे कर जाते हैंमानस पटल पर छविअंकित हो

बसंत की बहार-डॉ इंदु कुमारी

February 24, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

मेरे जीवन रथ का सारथी

February 24, 2022

मेरे जीवन रथ का सारथी कुछ भी नहीं समझ आता थादुनियां के रंगों मेंकौनसा रंग था जो भाएगा या सजेगा

महापुरुषों का नाम भुना लिया हैै-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

महापुरुषों का नाम भुना लिया है वक्त गुजरने के साथसच्ची, सरल शिक्षाओं कोरूढ़ करके सदियों के लिएजटिल हमनें बना लिया

दोगला व्यवहार-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

दोगला व्यवहार गायों से नहीं चाहे हमने बछड़ेऔर स्त्रियों से लड़कियां,दोनों के प्रति हमारे समाज काअघोषित सा दुराव रहा है,

मेरा प्यार आया है-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

मेरा प्यार आया है भटका हूं तेरी तलाश में बहुतमिले हो अब तो मुझमें ठहराव आया है,करने दे थोड़ा आरामअपनी

Leave a Comment