Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Desh ko naman by Indu kumari

 देश को नमन हमने अपने सिर पर बांध  लिये  कफन ऐसे देश को  नमन–2 जिनके सिर हिमालय चरणों को धोता …


 देश को नमन

Desh ko naman by Indu kumari

हमने अपने सिर पर

बांध  लिये  कफन

ऐसे देश को  नमन–2

जिनके सिर हिमालय

चरणों को धोता सागर

ये हमारे है प्यारे वतन 

ऐसे देश को   नमन—2

जहां ऋषि -मुनियों

की खिले है चमन

ऐसे देश को नमन–2

जहां की धरती

है सोना  उगले

जहां के बच्चे हैं 

उस देश के रत्न 

ऐसे देश को नमन–2 पावननदिया बहती जहां

एकता का हो संगम

ऐसे देश के   नमन

      स्व रचित अप्रकाशित रचना 

डॉ.इन्दु कुमारी हिन्दी विभाग मधेपुरा बिहार


Related Posts

अच्छे के लिए होता है !

March 26, 2022

अच्छे के लिए होता है ! राजा और मंत्री शिकार के लिए निकले, जंगल में आए, बहुत सारी झाड़ी और

दयावान बने!

March 26, 2022

दयावान बने! सोए हुए शेर के ऊपर चढ़ा चूहा,शेर उठा और हुआ आग बबूला,गुस्से में कहा, तुम्हें कौन बचाएगा,यह खूंखार

अजय प्रसाद की रचनाएं

March 26, 2022

अजय प्रसाद की रचनाएं  हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों

मेरा मन है एक बंजारा- वीना आडवाणी तन्वी

March 26, 2022

मेरा मन है एक बंजारा मेरा मन है एक बंजारा स्थिर नहीं ये फिरता मारामाराकभी प्राकृतिक सौंदर्य में फिरेतो कभी

हौंसले-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

हौंसले एक सुंदर नारीचल पड़ी गगन विहारीथा उसे उडना बहुतदूर दूर क्षितिज से भी दूरपंख थे छोटे और कोमलपार करेगी

जब वक्त थम सा गया-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

जब वक्त थम सा गया एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गयामिलने के लिए उसी से

PreviousNext

Leave a Comment