Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Desh ko naman by Indu kumari

 देश को नमन हमने अपने सिर पर बांध  लिये  कफन ऐसे देश को  नमन–2 जिनके सिर हिमालय चरणों को धोता …


 देश को नमन

Desh ko naman by Indu kumari

हमने अपने सिर पर

बांध  लिये  कफन

ऐसे देश को  नमन–2

जिनके सिर हिमालय

चरणों को धोता सागर

ये हमारे है प्यारे वतन 

ऐसे देश को   नमन—2

जहां ऋषि -मुनियों

की खिले है चमन

ऐसे देश को नमन–2

जहां की धरती

है सोना  उगले

जहां के बच्चे हैं 

उस देश के रत्न 

ऐसे देश को नमन–2 पावननदिया बहती जहां

एकता का हो संगम

ऐसे देश के   नमन

      स्व रचित अप्रकाशित रचना 

डॉ.इन्दु कुमारी हिन्दी विभाग मधेपुरा बिहार


Related Posts

Bachpan aur budhapa by Jitendra Kabir

November 15, 2021

 बचपन और बुढ़ापा एक उम्र में… मान ली जाती हैं ज्यादातर फरमाइशें, अंट-शंट बकने का भी शान से प्रदर्शन करवाया

Mera gaon kavita by Mausam khan Alwar Rajasthan

November 14, 2021

 मेरा गांव |Mera gaon kavita by Mausam khan कितनी सादगी आज भी है मेरे गांव में ,चटनी के संग रोटी

Unka aana aur jana by Jitendra Kabir

November 13, 2021

 उनका आना और जाना उनका आना और जाना मेरी आंखों का टिक जाना बस उन पर, होंठों पर बड़ी सी

Bal divash by Jayshree virami

November 13, 2021

 बाल दिवस आज नवाजेँ चालों अपने नौ निहालों को सजाएं उनके जीवन को बचाएं उन्हे बालाओं से सुख दुःख से

Shesh smritiyan by Dr. H.K. Mishra

November 13, 2021

 शेष स्मृतियां चलो एक बार मिलते हैं फिर से, अजनबी बन के हम दोनों उसी तट, वही मंदिर आश्रम चट्टानों

Kaisa jivan by Indu Kumari

November 13, 2021

 कैसा जीवन जीवन है समरसता की धारा छल  प्रपंचों को करें किनारा सादगी नर जीवन की पहचान मानव सब जीवों

Leave a Comment