Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Desh hamara bharat by Indu kumari

 देश हमारा भारत भारत भूमि हमें तुमसे प्यार है  जननी हमारी हम सेवा में तैयार है शीश-मुकुट अडिग हिमालय  चरणों …


 देश हमारा भारत

Desh hamara bharat by Indu kumari

भारत भूमि हमें तुमसे प्यार है 

जननी हमारी हम सेवा में तैयार है

शीश-मुकुट अडिग हिमालय 

चरणों को धोता सागर   है

पावन गंगा बहती यहां पर

नदिया संगम की धारा   है

गंगा सागर की दृश्य मनोरम

प्रकृति का सुन्दर उपहार है 

भारत भूमि हमें तुमसे प्यार है 

कृषि उत्पादन देश हमारा 

ऋषि प्रधान  देश है    ये 

सभी धर्मो के फूल खिले हैं

भारत भूमि उनके आधार है

एकता रूपी धागा मेंबंधकर

आपस में नहीं तकरार  है

भारत भूमि हमें तुमसे प्यार है 

रिति-रिवाजों के सुन्दर रेले है

पर्व त्योहारों के लगते मेले है

वक्त आने पर भारत भूमि के 

जवानों करते जान निसार है 

      स्व रचित अप्रकाशित रचना 

डॉ.इन्दु कुमारी मधेपुरा बिहार


Related Posts

अकेली होती कहां

June 24, 2022

 अकेली होती कहां डॉ. इन्दु कुमारी मेरे तो सब साथी  मैं अकेली होती कहां  हवा से भी बातें करती  पेड़

जल संरक्षण

June 24, 2022

 जल संरक्षण डॉ. इन्दु कुमारी जल ही जीवन है जीवन के संजीवन है इसे बचाना पुण्य कार्य  यही असली जनसेवार्थ।

लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी

June 23, 2022

 “लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी” भावना ठाकर

कितना कठिन होता है ना? माँ होना

June 23, 2022

 कितना कठिन होता है ना? माँ होना सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों

कविता – छाँव सा है पिता

June 23, 2022

 कविता – छाँव सा है पिता सिद्धार्थ गोरखपुरी गलतफहमी है के अलाव सा है पिता घना वृक्ष है पीपल की

कविता -आँखें भी बोलती हैं

June 23, 2022

 कविता -आँखें भी बोलती हैं सिद्धार्थ गोरखपुरी न जीभ है न कंठ है कहने का न कोई अंत है दिखने

PreviousNext

Leave a Comment