Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Dekhein pahle deshhit by Jayshree birmi

 देखें पहले देशहित हम किसी भी संस्था या किसी से भी अपनी मांगे मनवाना चाहते हैं, तब विरोध कर अपनी …


 देखें पहले देशहित

Dekhein pahle deshhit by Jayshree birmi

हम किसी भी संस्था या किसी से भी अपनी मांगे मनवाना चाहते हैं, तब विरोध कर अपनी मांगे पूरी करवाना चाहते हैं।वह चाहे दफ्तर हो, राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार हो।सत्याग्रह का उपयोग आजादी के आंदोलन में भी हुआ था।तब से लेकर अब तक बीसियों बार इस मूक शस्त्र का उपयोग हो चुका हैं और उसके वांछित या अवांछित परिणाम भी आ चुके हैं।छोटे थे तो जापान के बारे में सुना था– वहां की एक जूता बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों को कंपनी से अपनी कुछ मांगे मनवानी और कंपनी उनके साथ सहमत नहीं हो रही थी।सब ने कंपनी बंध का एलान कर दिया,आप सोचेंगे कि अपने देश जैसे कारखाने में ताले लग गए होंगे।नहीं,कारखाना समय पर खुला सभी कर्मचारीगण आए भी,काम भी शुरू हुआ लेकिन एक ही पैर के जूतों का उत्पादन हुआ जिससे उत्पादन तो हुआ किंतु बिक्री नहीं हो पाई।जिससे कंपनी पर दबाव तो आया किंतु उत्पादन चालू रहा,ऐसे कई दिन चला और अंत में कंपनी को उनकी मांगे पूरी करनी ही पड़ी क्योंकि एक ही पैर के जूतों से पूरा भंडारग्रह भर चुका था।जब उनकी मांगे पूरी हुई तब उन्हों ने उसी तरह से दूसरे पैर के जूतों का उत्पादन शुरू कर, बिक्री हो जाए वैसी परिस्थितियां पैदा कर दी, और कंपनी को आर्थिक घाटा नहीं हुआ और देश के अर्थ तंत्र को भी हानि नहीं पहुंची।अगर वे कारीगर घर बैठ जाते तो कारखाने के मालिक के साथ साथ उनके देश के अर्थतंत्र को भी हानि पहुंचनी थी।

 क्या हम कभी बंध का एलान देते हैं तब ये सब सोचते हैं? नहीं ,कभी नहीं।चाहे देश हो या कारखाना हो किसी के हित में सोचना हमारे दिमाग में आ ही नहीं सकता,सिर्फ स्वार्थवृति वाले हम ,सामूहिक हित के बारे में नहीं सोचते ,सिर्फ क्षणिक लाभ की सोचतें हैं,लंबी सोच वालों को ही ऐसा सकारात्मक खयाल आ सकता हैं।वैसे विद्यार्थियों को भी अपनी ही पढ़ाई की हानि कर आंदोलन करते देखा हैं हम सब ने।जो समय बीत जाता हैं आंदोलनों में और बंध में वह कभी वापस आता नहीं ये निश्चित हैं तो उस समय का व्यय किए बिना ही हम अपनी बातें बताकर उनका व्यावहारिक उपाय नहीं कर सकते।आप के पास समय हैं तो आप पैसे कमा सकते हैं लेकिन पैसें हैं तो समय नहीं ला सकते ये बात एकदम सत्य हैं।

   आज किसानों ने जो रास्तों को बंद करवाकर कई कारखानों को और दफ्तरों के आनेजाने के रस्तों को बंद किया हैं उससे हजारों लोगों की नौकरियां खतरें में पड़ी हैं,उनके परिवारों को खाने पीने के लाले पड़े हैं।आसपास के विस्तारों से दिल्ली में अपने काम के उपक्रम में आने जाने वाले लोगों को लंबे रास्तों से आनाजाना पड़ रहा हैं जिससे ईंधन और समय दोनों का व्यय होता हैं।जब भी किसी भी चीज का व्यय होता हैं उसके दूरगामी परिणाम आते हैं।जिसमे महंगाई , मालसमान की अछत जैसे परिणाम भी हो सकते हैं।

 जब अछत होती हैं,मतलब मांग और आपूर्ति के नियम के हिसाब से महंगाई बढ़ जाती हैं।जितनी चीजों की मांग हैं उतनी आपूर्ति  नहीं होती हैं, तो उसे आयत भी करना पड़ सकता हैं जिससे देश के  अर्थतंत्र पर नकारात्मक असर  भी असर पड़ सकता हैं।क्या किसान आंदोलनों का ऐसा विपरीत  प्रभाव नहीं पड़ सकता क्या? जिस चीन की चीजों का बहिष्कार कर रहें हैं हम उसीसे आयात कर उसको और मजबूत कर रहे हैं हमारे ही देशवासी? अगर उनकी मांगे हैं तो सरकार से बात कर या कोई दूसरे रचनात्मक तरीके अपना कर सरकार से विरोध कर सकतें हैं।नकारत्मक प्रवृत्ति से हकारात्मक परिणाम लाना शायद मुश्किल ही होगा।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

आपदा जोखिम की जड़ें कहीं? अंकुर कहीं।Where are the roots of disaster risk? Sprout somewhere.

January 19, 2023

आपदा जोखिम की जड़ें कहीं? अंकुर कहीं। अनियंत्रित शहरीकरण, भूकंपीय क्षेत्रों में निर्माण, तेजी से कटाव की गतिविधि ने इस

केंद्र और राज्य सरकार के बीच पिसता आम आदमी

January 19, 2023

 केंद्र और राज्य सरकार के बीच पिसता आम आदमी एक दशक से देश की सियासत में एक तरह की राजनीति

राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग

January 19, 2023

राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग स्वतंत्र, कानून का पालन करने वाले संस्थान आवश्यक जांच और संतुलन सुनिश्चित

व्यक्त होना सीखें : प्यार हो या बात | Learn to Express: Love or Talk

January 19, 2023

व्यक्त होना सीखें : प्यार हो या बात, व्यक्त नहीं होंगी तो मूर्ख मानी जाएंगी हम सुनते आए हैं कि

beti par lekh| बेटी पर लेख

January 19, 2023

मुझे मेरी बेटी पर गर्व है बेटियां मां लक्ष्मी सरस्वती का स्वरूप है आओ समाज में फैली कुरीतियों से बेटियों

सुख़ दुख़ दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव

January 19, 2023

सुख़ दुख़ दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव सुख़ दुख़ तो अतिथि हैं, बारी-बारी से आएंगे चले जाएंगे –

PreviousNext

Leave a Comment