Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Dekha hai maine by komal Mishra`koyal

  देखा है मैंने देखा है मैंने घरों में,कैद होती आवाजें, गुम होती खुशियाँ,उदास होते चेहरे।  पीले पड़ते होंठ, दम …


  देखा है मैंने

Dekha hai maine by komal Mishra`koyal

देखा है मैंने घरों में,कैद होती आवाजें,

गुम होती खुशियाँ,उदास होते चेहरे। 

पीले पड़ते होंठ, दम तोड़ती उम्मीदें।। 

सब कुछ तो देखा है ,और समझा भी है जरा-जरा। 

अपनी माँ की आँखों से,कोई कतरा गिरा-गिरा।। 

छीन कर हाथों से किताबें,चूड़ियाँ पहनाई जाती हैं, 

मतलब भी ना समझे पर,शादियां कराई जाती हैं।। 

रिवाज के नाम पर, बेड़ियाँ पहनाई जाती हैं। 

अना कि खातिर औरतें, बलि चढाई जाती हैं।। 

बुझा कर दीपक अंधेरे में, हर बार सताई जाती हैं। 

पर खोल दे गर ज़ुबाँ कभी तो, बेहया कहलाती हैं।।

                            नाम- कोमल मिश्रा “कोयल”

                             शहर – प्रयागराज


Related Posts

Aye dil aao tumhe marham lga du

July 16, 2020

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए है एक खूबसूरत रचना Aye dil aao tumhe marham lga du. तो पढिए और आनंद

Previous

Leave a Comment