Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Deep parv ka samman by Sudhir Srivastava

 दीपपर्व का सम्मान दीपों की लड़ियां सजाएं आइए दीवाली मनाएं, उल्लास भरा त्योहार मनाएं। एक दीप राष्ट्र के नाम भी …


 दीपपर्व का सम्मान

Deep parv ka samman by Sudhir Srivastava

दीपों की लड़ियां सजाएं

आइए दीवाली मनाएं,

उल्लास भरा त्योहार मनाएं।

एक दीप राष्ट्र के नाम भी जलाएं

भारतीयता के नाम भी एक दीप जलाएं

पर उन सैनिकों को न भूल जायें

जिन्होंने सरहद पर प्राण गँवाए,

उनके नाम का भी एक दीप जलाएं

साथ में एक दीप उन सैनिकों के लिए भी

जो सरहद की निगहबानी के कारण

दीवाली में घर न आ पाये,

जाने अनजाने हुतात्माओं के नाम भी

एक दीप श्रद्धा से जलाएं।

देश की खुशहाली, विकास

संपन्नता, संप्रभुता की खातिर

अपना दायित्व निभाएं,

कम से कम एक दीप तो जलाएं।

इतना भर करके न खुश हो जायें

अपने पड़ोस में किसी गरीब के

घर का अँधेरा मिटाएं,

दीवाली की खुशियों में 

उसके घर भी जाकर

एक दीप जरूर जलाएं,

मिलकर दीवाली मनाएं।

अपने घर का अँधेरा तो 

सभी दूर कर लेते हैं मगर,

हर किसी का घर हो सके रोशन

हर कोई ये हौसला दिखाए।

दीपपर्व सिर्फ़ दीप जलाने के लिए 

भला कहां आता है?

सच तो ये है कि दीपपर्व

हर साल इसलिए आता है

कि हर घर हर कोना रोशन होगा

दीपपर्व तभी सार्थक होगा।

हर साल दीपपर्व मायूस होकर जाता है

अगले साल फिर कोने कोने में

बिखरे उजाले को देखने आता है,

दीपपर्व का सम्मान करें

एक एक दीप के साथ सब मिलकर

दीपपर्व का सम्मान करें।

● सुधीर श्रीवास्तव
     गोण्डा, उ.प्र.
  8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

April 27, 2022

 मेरे घर कि चौखट आज भी खुली कभी तो तुम्हें भी मेरी याद आती ही होगी कभी तो मेरी याद

देखो हर शब्द में रब

April 27, 2022

 देखो हर शब्द में रब दिल को जीत लेते शब्द दिल को भेद भी देते शब्द दिल को बहलता मिठास

काट दिए मेरी कलम के पर

April 27, 2022

 काट दिए मेरी कलम के पर तमन्ना थी कभी खुद को , मैं खूब संवारूंगीसौलह श्रंगार करके , मैं खुद

मोहब्बत ए परवाना

April 27, 2022

मोहब्बत ए परवाना कहते हैं वो मोहब्बत ए परवाने , इस अंजुमन में रखा क्या हैतेरे हुस्न दीदार के बिना

गम की बदली

April 25, 2022

 ‘गम की बदली’ मैं गमों से भरी सराबोर बदली हूँ बरसना मेरी फ़ितरत है, यूँ तरस खाकर पौंछिए नहीं रहने

कविता -मेरा जीवन सुखी था

April 25, 2022

 कविता -मेरा जीवन सुखी था  मेरा जीवन सुखी था  जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे  मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता

PreviousNext

Leave a Comment