Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Chor chhipa baitha hai man me by dr hare krishna mishra

 चोर छिपा बैठा है मन में चोर छिपा बैठा है मन में मैं ढूंढ रहा हूं दूसरे तन में, कैसी …


 चोर छिपा बैठा है मन में

Chor chhipa baitha hai man me by dr hare krishna mishra

चोर छिपा बैठा है मन में

मैं ढूंढ रहा हूं दूसरे तन में,

कैसी विडंबना है जीवन की

आरोपित करता मैं किसको ?

बड़ी जलन जीवन जीने में,

मृत्यु लोक तो शोक भरी है ।

यहां न कोई ठोर ठिकाना,

ले चल मुझको दूसरे तट पर। ।।

बात कहूं मैं किसी से अपनी,

ऐसा कोई मित्र नहीं है ,

जाने अनजाने में किसको,

कैसे समर्पित कर दूं तन मन।   ।।

खोज रहा हूं गुरु हो अपना,

मानस पट पर कुछ तो लिख दे,

विषयों पर दो शोध किया है,

अपने पर कोई शोध नहीं है। ।

जीने का कोई अर्थ नहीं है,

रहना फिर भी दुनिया संग है,

यही विडंबना जीवन की है

सोच बहुत मैं घबराता हूं। ।।

जीना भी क्या जीना है,

सुख-दुख के तट खाली हैं।

मौन बना दर्शक बैठा हूं 

यही विडंबना मेरी है।   ।।

सोच समझकर मैं कहता हूं,

मेरी दुनिया बहुत है छोटी ,

ले चल मुझे तू अपने संग संग

जिस तट पर और कोई नहीं हो। ।।

बहुत साध्य जीवन की अपनी

कौन कला जीने की होगी। 

विषय वस्तु से बहुत दूर हूं,

लिखने का औचित्य कहां है।   ?

फिर भी कुछ कुछ लिख लेता हूं

अंदर से बिल्कुल खाली हूं,

यह  भी कैसा जीवन दर्शन,

अपने को उलझा रखा हूं।   ।।

  

                            तथास्तु,,,,,,, डॉ हरे कृष्ण मिश्र


Related Posts

माँ का समर्पण- अनीता शर्मा

December 23, 2021

माँ का समर्पण माँ का समर्पण उसे निभाती एक स्त्री । माँ शब्द अपने में सशक्त,सबको माफ कर चुप रहती।

जीवन भी गणित- सुधीर श्रीवास्तव

December 23, 2021

राष्ट्रीय गणित दिवस (22 दिसंबर) पर विशेष जीवन भी गणित हम और हमारे जीवन का हर पल किसी गणित से

प्रणय की धारा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

प्रणय की धारा मन का स्रोत बहुत है गहरा ,मन से निकली प्रणयकी धारा ,मन और धन का खेल निराला,

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं- जितेन्द्र ‘कबीर

December 22, 2021

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं साक्षात् भगवान का रूप मानतेहैं उसे,कुछ ही हैं लेकिन ऐसे,ज्यादातर ‘डाक्टर’ अंधे हुए पड़े हैंदवाई

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

Leave a Comment