Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

chhoti behna kavita by Anita Sharma jhasi

 छोटी बहिना एक डाली के फूल थे हम ,     कितने बसंत साथ जिये।         हर …


 छोटी बहिना

chhoti behna kavita  by Anita Sharma jhasi

एक डाली के फूल थे हम ,

    कितने बसंत साथ जिये।

        हर सुख दुख में साथ रहे,

            पल दो पल भी जुदा नहीं थे।

कितने प्यारे पल थे बहना,

     साथ साथ हम पढ़ते थे तब।

          कितनी बातें कितनी यादें हैं,

               छोटी बहिन प्यारी सी थी तुम।

तुम ही बहन और मित्र थी,

     हर राज़ की राज़दार थी तुम।

          हर क्षण साथ रहे हम बहना,

              क्यों एकान्त पथ चुना था तुमने।

कितनी अकेली हूँ तुम बिन मैं,

      कैसे जीवन जीती तुम बिन।

          जुड़वा लोग समझते थे हमें,

               कैसे छोड़ चली एकाकी।

      —–अनिता शर्मा झाँसी


Related Posts

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

PreviousNext

Leave a Comment