Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

chal chod ye aadat hai koi khta nhi by shashi suman up

 शीर्षक चल छोड़, ये आदत है, कोई खता नहीं l तेरे फ़िक्र में हैं हम और तुझे पता नहीं l …


 शीर्षक
चल छोड़, ये आदत है, कोई खता नहीं l

chal chod ye aadat hai koi khta nhi by shashi suman up



तेरे फ़िक्र में हैं हम और तुझे पता नहीं l
चल छोड़, ये आदत हैं, कोई ख़ता नहीं l

कभी कसमें और कभी वादा l
हर बार बस पहले से ज़्यादा l
इकरार, प्यार, दोनों बेशुमार l
और भारी हर पल का इंतज़ार l
गिरे हम बहुत मगर ये कोई खिजा नहीं l
चल छोड़, ये आदत हैं, कोई ख़ता नहीं l

तीखी, खट्टी, चंचल शरारतें l
और तेरी जी से ज़्यादा हिफ़ाजतें l
नज़र की शोखियाँ और चाहतें l
तेरी मेरे लिए दिन रात की इबादतें l
तेरी अब मगर इल्तज़ा नहीं या खुदा की रजा नहीं l
चल छोड़, ये आदत हैं, और कोई ख़ता नहीं l

जिंदगी की चाहत में जान कहने लगा l
खुद को समर्पण कर मान कहने लगा l
जो भूल बैठ खुद को मोहब्बत में तेरे l
उजियारे की चाह में पा बैठा अँधेरे l
भूल गए तुम भी उसको, किया इश्क अता नहीं l
चल छोड़, ये आदत है, और कोई ख़ता नहीं l

शशि सुमन

प्रयागराज , उत्तर प्रदेश

Related Posts

उड़ान – डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

उड़ान हम पंछी है धरा अंबर केसपनों की हम भरे उड़ान स्वच्छंद हो विचरण करूंहै हमें परिधि का ज्ञान जुड़ी

बेनाम- डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

बेनाम अन्दर की अच्छाईझलक दे ही जाती है समुद्र की गहराई कोछुपाई नहीं जाती है समझने वाले न होपीड़ा बताई

कामना- डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

कामना फूलों के शहर होप्रेम मय डगर होस्वच्छ नगर होखुशियों के घर मेंएकता माहौल हो समता के गीत सेखुशनुमा संगीत

मित्रता – डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

मित्रता सर्वोपरि सब रिश्तों मेंकीमत न लेते किस्तों में सार शब्द है मित्रता केसार्थक पहलू है रिश्तों के ईश्वर स्वरुप

सीखें हम बुजुर्गों का सम्मान करना- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सीखें हम बुजुर्गों का सम्मान करना हर बात सही नहीं हो सकती किसी की कभी भीलेकिन जो हमारे लिए सही

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन- डॉ. माध्वी बोरसे!

December 27, 2021

चलो निकालें सप्ताह में एक दिन! चलो निकालें सप्ताह में एक दिन, जिसमें खुद का साथ हो,बस खुद से बात

Leave a Comment