Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir

 बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग  डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर, …


 बुरा मनाकर मत बैठो

Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir

उस समय भले ही बुरा लगे

जब हमारे बुजुर्ग 

डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,

लेकिन इसके लिए 

उनसे नाराज होकर बैठने से पहले 

याद रखना होगा हमें

कि उस डांट में भी चिंता छुपी होगी

कहीं न कहीं हमारी भलाई की ही।

उस समय भले ही बुरा लगे

जब हमारे बुजुर्ग

टोक देते हैं हमें जब कोई काम नहीं होता

उनकी सोच के मुताबिक

लेकिन इसके लिए 

उनसे नाराज होकर बैठने से पहले

याद रखना होगा हमें

कि उस टोकने के पीछे भी मंशा छुपी होगी

कहीं न कहीं हमारी भलाई की ही।

उस समय भले ही बुरा लगे

जब हमारे बुजुर्ग

हमारी इच्छा के विरुद्ध

जिद्द कर लेते हैं किसी काम को 

पूरा करने की,

लेकिन इसके लिए

उनसे नाराज होकर बैठने से पहले

याद रखना होगा हमें

कि बचपन से अब तक सैंकड़ों बार

उन्होंने भी मानीं है हमारी अजीब जिद्दें कई।

                               जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

Leave a Comment