Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं

lekh

मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं

मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं जी हाँ ये दो पंक्तिया इस लेख के भाव को पूरी तरह …


मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं

रिश्तों के भँवर में ढूंढती हुई अपनी पहचान
 खो देती हूँ मैं अपनी गरिमा और सम्मान

जी हाँ ये दो पंक्तिया इस लेख के भाव को पूरी तरह दर्शाती हैं.भारतीय समाज मे हर महिला अपनी पहचान ,अपना वजूद बस रिश्तों से ही करती हैं, चाहे वो बाहर कितनी ही सफल क्यों ना हो पर उसकी असली खुशी उसके रिश्ते ही होते हैं,इसलिये बहुत बार सब कुछ जानते और समझते हुये भी महिलायें पति की मार पीट को सहन करती रहती हैं
पाकिस्तानी लेखिका तहमीना दुरानी ने अपनी आत्मकथा “मेरे आका” में अपने दिल का दर्द बयां किया था.तहमीना ने पाकिस्तान के पंजाब के गवर्नर मुस्तफा से विवाह किया था. विवाह होते ही उनके सपनों का महल भरभरा कर गिर गया,जब उनके शौहर रातदिन ना केवल उन पर शाब्दिक हमले करते थे बल्कि उनके साथ इतनी मारपीट करते थे कि वो अपना आत्मविश्वास खोती जा रही थी.तहमीना के शब्दों में उनके परिवार को भी इस बात का इल्म था पर उनके ताकतवर कद ने सबके होंठो पर चुप्पी का ताला लगा दिया था. तहमीना को स्वयं ये लगता था कि मुस्तफा के बिना उनका कोई वजूद नही हैं.इसलिये बहुत सालों तक अपने वजूद के लिये, अपने बच्चों की परवरिश के खातिर वो ये हिंसक व्यवहार झेलती रही.जब तहमीना ने अलग होने का फैसला किया तो ना केवल उनके शौहर बल्कि उनके अपने परिवार के सदस्य उनके खिलाफ उठ खड़े हुये थे.पर तहमीना ने वास्तव में अपनी पहचान इस ख़राब रिश्ते से बाहर आकर ही बनाई हैं.आज उनकी पहचान एक सफल लेखिका और समाज सेविका के रूप में हैं और इसमें ना तो उनके परिवार का और ना ही उनके शौहर का कोई योगदान हैं.
सिनेतारिका जीनत अमान का पहला विवाह अभिनेता संजय खान से सन 1978 में हुआ था और उस विवाह के तोहफे के रूप में ज़ीनत की दाई आंख की रोशनी जाते जाते बची.पर जीनत ने पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नही करी थी क्योंकि उनके मुताबिक संजय को वो धीरे धीरे अपने प्यार से सुधार लेगी. हालांकि जल्द ही दोनो का तलाक़ हो गया था.
दिल्ली एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में उच्च पद पर कार्यत भूपिंदर सिंह अपनी पत्नी रश्मि सिंह पर कभी भी गुस्से में बेकाबू हो कर हाथ उठा देते हैं.रश्मि भी कॉलेज में लेक्चरर हैं पर वो कभी भी अपने पति के खिलाफ आवाज़ नही उठा पाई.
आज जब वो पचपन वर्ष की हैं तो उनके ही शब्दों में”मैंने ज़िन्दगी बस काटी हैं, कभी खुल कर जीया नही हैं.पैसों की कोई कमी नही थी पर मेरा आत्मसम्मान तब ही दम तोड़ चुका था जब पहली बार भूपिंदर ने मुझ पर हाथ उठाया था”रश्मि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी थी पर समाज में अकेले रहने का वो साहस नही जुटा पाई और उससे अधिक आसान उन्हें पति की मार पीट सहन करना लगा था.

पार्टी पूरे जोरे शोरो से चल रही थी.नीली शिफॉन में काम्या बेहद खूबसूरत पर असहज लग रही थी, कारण था उसका पति विवेक जो हर समय उसके इर्दगिर्द एक साये की तरह चिपका रहता हैं.वो खुल कर सांस भी नही ले सकती थी.काम्या को हर कार्य बहुत सोच समझ कर करना पड़ता था अन्यथा उसे विवेक की पिटाई का सामना करना पड़ता था.ऐसा नही हैं कि काम्या पढ़ीलिखी नही हैं पर मेहनत करके अपनी आजीविका कमाने के बजाए उसे पति की मार पीट ही ठीक लगती हैं.”क्या हुआ अगर कभी हाथ उठा दिया तो, बच्चो का और मेरा कितना ख्याल तो रखते हैं.अभी करवाचौथ पर विवेक ने मुझे कितना खूबसूरत हार दिया था” ऐसा सोचकर काम्या ने पति की मार पीट में उसका छुपा हुया प्यार ढूंढ लिया.

यहाँ पर हम गरीब औरतों की बात नही कर रहे हैं.यहाँ पर हम बात करेंगे, समृद्ध परिवार की पढ़ी लिखी महिलाओं की, क्या मजबूरी हैं उनके सामने कि रात में पति की मारपीट को झेल कर,दिन में उन्हीं साहब की गरिमामय मिसेज का किरदार निभाती हैं.
ऐसे बहुत से उदहारण हमारे आसपास देखने को मिलेंगे जहाँ पर महिलाएं पति की मारपीट को उनके इंद्रधनुषी प्यार का ही एक रंग मानती है .
प्यार के अनेक रूप हैं, प्यार को ईश्वर का रूप भी मानते हैं, प्यार में इंसान बदल जाता हैं और भी ना जाने प्यार या इश्क़ को लेकर कितने फ़लसफ़े प्रसिद्ध हैं .
अगर सिनेमा की बात करे तो मूक प्यार से हिंसक प्यार तक का एक लंबा सफर हमारे फिल्मों के नायक ने किया हैं. पिक्चरों में, डर, अग्निसाक्षी और दरार जैसी कितनी ही फिल्मों में हिंसक प्यार ने ऐसे नकारा और हिंसक आशिकों को प्यार के देवता की पदवी पर बैठा दिया हैं.
ऐसे ही आशिक़ अपनी प्रेमिकाओं पर जान छिड़कते हैं, पल पल व्हाट्सएप या फेसबुक के जरिये से रातदिन अपनी तथकथित गर्ल फ्रेंड या प्रेमिकाओं की हर क्रियकल्पों पर नज़र रखते हैं पर जब ऐसे प्रेमी प्रेमिकाओं की शादी हो जाती हैं तो ये ही जुनूनी प्यार अब पत्नियों की गले की हड्डी बन जाता हैं और जब पत्नी विरोध करना चाहती हैं तो नतीजा ये ही निकलता हैं, मार पीट भरा हिंसक व्यवहार.
उच्च वर्ग की महिलाओं के पास पैसे और रुतबे की कोई कमी नही होती हैं तो फिर क्या कारण हैं जो उच्च वर्ग की महिलाएं भी मेकअप की गहरी परतों के पीछे पति की मार पीट को भी जज्ब कर लेती हैं:

1.बच्चों की अच्छी परवरिश- बच्चों को माता और पिता दोनो की जरूरत होती हैं अच्छी परवरिश के लिए .ये बिल्कुल सच हैं पर बच्चों को मजबूत परिवार ,खुशहाल बचपन और मीठी स्मृतियों की भी ज़रूरत होती हैं.अगर बच्चें अपनी माँ को सारा समय मार सहते हुये या रोते हुये देखेगे तो वो उनके लिये कोई अच्छी स्थिति नही हैं.इसलिये आप अलग रहे पर खुश रहे , आप अपने आत्मसम्मान का सम्मान करेगी,आपके बच्चे खुद ही मजबूत बन जायेंगे.
2.विक्टिम या शिकार बन कर रहना- ये महिलाओं को सबसे आसान लगता हैं.वो अपने आत्मसम्मान ,अपनी गरिमा को विवाह के बाद ताक पर रख कर एक विक्टिम कार्ड खेलती हैं.मनोवैज्ञानिको के अनुसार इसमें ऐसी महिलाओं को एक अलग किस्म का आनंद आता हैं. बेचारी का तमगा लगाकर घूमना,सबसे सहानुभूति बटोरना उनको बहुत पसंद होता हैं.इसका मुख्य कारण हैं क्योंकि ये महिलाएं कमजोर व्यक्तित्व की हैं. अपने जीवन की परिस्थिति के लिये किसी और को ज़िम्मेदार ठहरना सबसे आसान विकल्प हैं.
3.क्या कहेंगे लोग- ये हैं सबसे बड़ा रोग कि क्या कहेंगे लोग.बहुत बार ऐसे भी देखने को मिलता हैं कि महिलाएं आर्थिक रूप से आज़ाद हैं, पढ़ी लिखी हैं पर फिर भी पति को नही छोड़ पाती हैं क्योंकि उन्हें अपने आत्मसम्मान से अधिक सामाजिक सुरक्षा अधिक प्रिय लगती हैं.
4.आत्मविश्वास की कमी- लड़कियों की परवरिश करते समय हम जाने अनजाने उनमें ये भाव भर देते हैं कि अकेली महिलाओं का समाज मे कोई सम्मान नही होता हैं.अकेले रहना से अच्छा हैं साथ मे कोई साथी हो, साथ ही साथ बार बार ये सलाह देना कि देर सवेर पुरुष को अक्ल आ ही जाती हैं ,जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना समझदारी नही हैं और भी ना जाने कितनी बातें जाने अनजाने बचपन से उनके अंदर अंकुरित हो जाती हैं,जिसके कारण उनमें आत्मविश्वास की कमी आ जाती हैं.
5.आरामदेह जीवन की चाह- बहुत सारे केसेस में ये भी देखने को मिलता हैं कि महिलाओं का विवाह यदि धनिक परिवार में हो जाता हैं तो उन्हें उस जीवनशैली की आदत पड़ जाती हैं .पति की मारपीट को वो इस जीवनशैली के भुगतान के रूप में देखने लगती हैं.
अगर विश्लेषण करा जाए तो एक ही बात सामने निकल आएगी,अगर हम अन्याय सहेंगे तो इसमें अन्याय करने वाले से ज्यादा अन्याय सहने वाले की भी गलती हैं.
जब तक आप अपने लिये खड़ी नही होगी तो किसी ओर से आप आश कैसे कर सकती हैं.एक कदम बढ़ा कर तो देखिये, ये इतना भी कठिन नही हैं.घुट घुट कर गुलामी के सुरक्षित जीवन जीने से अच्छा हैं ,थोड़ी सी चुनौतीयो का सामना करते हुये स्वछंद आकाश में उड़ना.आपका रिश्ता पहले अपनेआप से हैं और बाद में किसी और के साथ.
सात फेरे लिये हैं ज़िन्दगी भर साथ निभाने के लिये
वर्ना उड़ चलो अपने पंखों के साथ नए ठिकाने पर.

Ritu Verma
Flat NO-O-204, Block -O, 3 FLOOR
Sector Saffron, Niho ,Scottish Garden
Indirapuram.
Ghaziabad


Related Posts

डॉ. माध्वी बोरसे ने बेहतरीन शिक्षण तकनीकों के माध्यम से छात्रों के जीवन को आसान बना दिया।

June 4, 2023

डॉ. माध्वी बोरसे सिंह इंसा ने सबसे बेहतरीन शिक्षण तकनीकों के माध्यम से छात्रों के जीवन को आसान बना दिया।

पइसा दे दो पइसा-व्यंग्य | Paisa de do paisa-satire

June 2, 2023

 पइसा दे दो पइसा-व्यंग्य पइसा दे दो पइसा, हाहाहाहाहा- अरे-अरे आप ग़लत समझ रहे । ये कोई मुफ्त मे पैसे

विश्व माता पिता दिवस 1 जून 2023 |

June 2, 2023

सुनिए जी ! मम्मी पापा आप अपने बच्चों के लिए ख़ुदा से भी बढ़कर हो भारत में विश्व माता पिता

लगता है वर्तमान का वक्त भी, इतिहास दोहराएगा | Looks like history will repeat itself

June 1, 2023

लगता है वर्तमान का वक्त भी, इतिहास दोहराएगा सही कह रही हूं, मुझे तो लगता है वर्तमान भी इतिहास ही

दास्तान-ए-तवायफ :नाच-गाना नहीं राष्ट्र के लिए गौरवगान कर चुकी वीरांगनाएं | Dastan-e-Tawaif

June 1, 2023

दास्तान-ए-तवायफ:नाच-गाना नहीं राष्ट्र के लिए गौरवगान कर चुकी वीरांगनाएं दास्तान-ए-तवायफ हम अक्सर जाने-अंजाने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को तो याद करते

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 ज़ारी | RBI annual report 2022-23 released

June 1, 2023

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 ज़ारी आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट 22-23 में मज़बूत आर्थिक नीतियों, 500 रू के नकली नोट, फ्रॉड

PreviousNext

Leave a Comment