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bihadon ki bandook by priya gaud

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर …


 “बीहड़ों की बंदूक”

bihadon ki bandook by priya gaud

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें

दागी जाती हैं गोलियां

उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

दी जाती है अपने चूल्हों में आग

अपने और अपनों के चूल्हों में आग

बनाये रखने के लिए दागी जाती हैं गोलियां

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें

दागी जाती हैं गोलियां

दागी जाती हैं गोलियां ताकि खींचा न जाएं सीने से पल्लू

ना उछाली जाए भरे समाज में पगड़ी

ना बनाया जाए किसी को फूलन और तोमर

इसलिए दागी जाती हैं गोलियां

दागी जाती हैं गोलियां

ताकि न घुमाया जाए गाँव मे करके स्त्री को नंगा

न सहना पड़े अनचाहा किसी पुरूष का स्पर्श

न ही अंधे प्रशासन की उंगलियां सीने पर नाचे

इसलिए दागी जाती हैं गोलियां

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें…


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