Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

bihadon ki bandook by priya gaud

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर …


 “बीहड़ों की बंदूक”

bihadon ki bandook by priya gaud

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें

दागी जाती हैं गोलियां

उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

दी जाती है अपने चूल्हों में आग

अपने और अपनों के चूल्हों में आग

बनाये रखने के लिए दागी जाती हैं गोलियां

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें

दागी जाती हैं गोलियां

दागी जाती हैं गोलियां ताकि खींचा न जाएं सीने से पल्लू

ना उछाली जाए भरे समाज में पगड़ी

ना बनाया जाए किसी को फूलन और तोमर

इसलिए दागी जाती हैं गोलियां

दागी जाती हैं गोलियां

ताकि न घुमाया जाए गाँव मे करके स्त्री को नंगा

न सहना पड़े अनचाहा किसी पुरूष का स्पर्श

न ही अंधे प्रशासन की उंगलियां सीने पर नाचे

इसलिए दागी जाती हैं गोलियां

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें…


Related Posts

हम सभी एक समान-डॉ. माध्वी बोरसे

December 10, 2021

हम सभी एक समान! जाति, धर्म से क्यों करते हैं भेदभाव,क्यों नहीं इंसानियत को आजमाओ? हम सभी का रक्त का

आंसू छलके- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

आंसू छलके आंसू भरकर स्वागत करना, बहुत पुरानी परंपरा अपनी,इंतजार लंबी जब होती है ,मन के आंसू छलक आते हैं,।।

राजनीति होनी चाहिए- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

 राजनीति होनी चाहिए राजनीति होनी चाहिए लोगों के बीच आपसी भाईचारा,प्रेम एवं सौहार्द बढ़ाने के लिए,मगर अफसोसराजनीति होती हैउनके बीच

झंडा दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 10, 2021

झंडा दिवस आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है सात दिसंबर उन्नीस सौ उनचास कोये मनाया गया था पहली बारतब से

गीत हमारे- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

गीत हमारे कुछ गीत ऐसे दर्द भरे,गाकर सुना सकता नहीं, पहले मेरे अश्क बहते,दर्द छुपा पाता नहीं ।। दृश्य ऐसे

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

December 10, 2021

आधे अधूरे अरमान अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत इश्क की भी तो थी चाहत गहरी चाहतों में घीरी

Leave a Comment