Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

bihadon ki bandook by priya gaud

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर …


 “बीहड़ों की बंदूक”

bihadon ki bandook by priya gaud

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें

दागी जाती हैं गोलियां

उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

दी जाती है अपने चूल्हों में आग

अपने और अपनों के चूल्हों में आग

बनाये रखने के लिए दागी जाती हैं गोलियां

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें

दागी जाती हैं गोलियां

दागी जाती हैं गोलियां ताकि खींचा न जाएं सीने से पल्लू

ना उछाली जाए भरे समाज में पगड़ी

ना बनाया जाए किसी को फूलन और तोमर

इसलिए दागी जाती हैं गोलियां

दागी जाती हैं गोलियां

ताकि न घुमाया जाए गाँव मे करके स्त्री को नंगा

न सहना पड़े अनचाहा किसी पुरूष का स्पर्श

न ही अंधे प्रशासन की उंगलियां सीने पर नाचे

इसलिए दागी जाती हैं गोलियां

बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें…


Related Posts

यादों का सिलसिला- डॉ इंदु कुमारी

February 3, 2022

यादों का सिलसिला तेरी हसीन यादों का सिलसिला अमिट है धूमिल नहीं होने वाली प्रेम पौधे उगाने वालीदमकती चेहरे की

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

February 3, 2022

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत

तू ही तू है- नाचीज़ बीकानेरी “

February 3, 2022

तू ही -तू है जमीं से फलक तक तू ही -तू है । दिल की धड़कनों में तू ही –

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से-विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से ऊँचा हो गया कद लोगों का जमीन सेसुना है जमीनें बंजर पड़ी

मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 3, 2022

मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने

Leave a Comment