Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhut yad aate ho tum by vijay Lakshmi Pandey

 शीर्षक : बहुत याद आते हो “तुम”…!!! ऊँची -ऊँची इमारतें …! शहरों की चहल -पहल , महंगी गाड़ियों की रेलम-रेल …


 शीर्षक : बहुत याद आते हो “तुम”…!!!

Bhut yad aate ho tum by vijay Lakshmi Pandey

ऊँची -ऊँची इमारतें …!

शहरों की चहल -पहल ,

महंगी गाड़ियों की रेलम-रेल ।।

पर कहाँ गया अपनापन ???

बहुत याद आते हो तुम …!!

भाभी से घण्टों बतियाना ,

और रुमाल की कशीदाकारी …।

पूछ-पूछ कर सिंधी के बूटे निकालना ।।

घूम -घूम कर अम्माँ व बुआ को दिखाना ,

बहुत याद आते हो तुम …!!!

रंग-बिरंगे गुलदस्ते ,

व पर्दे पर शायरी लिखना ।

स्पंजी  गुड़िया की सजावट ,

दीवारों पर टँगे हमारे  ही हाथों से,

राधा -कृष्ण की मोहिनी मूरत  ।

बहुत याद आते हो तुम …!!!

गाँव के शिवाले पर एकत्र होना,

बात-बात में  दोस्ती के खातिर कसमें खाना।

नदी किनारे बर्तनों को चमकाना,

और मस्तीखोर  अनबूझ  जीवन …।

बहुत याद आते हो तुम …!!!

मनोरंजन के नाम पर ,

महीनों बाइस कोप का इंतजार ।

जादूगर का जादू ; 

कठपुतली का नाच ,

बन्दर -भालू का ड्रामा …।

बहुत याद आते हो तुम …!!!

हवा मिठाई व चनाजोर गरम की मस्ती ,

खट्टी -मीठी  रंग -बिरंगी गोलियां ।

गन्ने चूसने की चढ़ा -खड़ी ,

आम और जामुन को डाल से ।

गिरते ही लपक लेनें की कोशिश …।।

बहुत याद आते हो तुम …!!

अमराइयों की झुरमुट में ,

चिड़ियों की चह- चह ,

मकई के खेतों में प्यारा सा मचान ।

ककड़ी के फूट का खूबसूरत स्वाद ।।

हाँ, तभी तो बहुत याद आते हो तुम …!!

बहुत   याद   आते   हो   तुम    ।।

स्वरचित मौलिक रचना साभार प्रेषित

विजय लक्ष्मी पाण्डेय

एम. ए. , बी. एड. (हिंदी)

आजमगढ़, उत्तरप्रदेश


Related Posts

kavita sanwr jati hai by ajay prasad

June 9, 2021

संवर जाती है धूप जब भी बर्फ़ सी पिघल जाती हैतो मजदूरों के पसीने में ढल जाती है।ठंड जब कभी

kavita sarkari aakado me by jitendra kabir

June 8, 2021

सरकारी आंकड़ों में… सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती हैं सिर्फ मौतें, दर्ज नहीं होती लेकिन उनमें मरने वालों की तकलीफें,

kavita sakhi keh do by anita sharma

June 8, 2021

 सखी कह दो” अभिलाषा में आशा जोड़ू,सखी कह दो मैं क्या जोड़ू।इच्छाओं का अंबार समेटू,या अनुरागी पथ को चुन लूँ।

kavita- pacchim disha ka lamba intjaar by mahesh keshari

June 8, 2021

 पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार..  मंझली काकी और सब  कामों के  तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और  बैठ

gazal-ateet ka geet by abhishek sudhir

June 8, 2021

 ग़ज़ल :- “अतीत का गीत” आज तुम  पर  कोई  गीत  लिखने  बैठा  हूँ  तुम्हें इस  मन  का   मीत  लिखने   बैठा   हूँ 

kavita bhavnayen barish ki by sudheer shrivastav

June 7, 2021

 भावनाएँ बारिश की ****************ये भी अजीब सी पहली हैकि बारिश की भावनाओं को तोपढ़ लेना बहुत मुश्किल नहींसमझ में भी

Leave a Comment