Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhookhe ki darm-Jat nhi hoti by Jitendra Kabir

 भूखे की धर्म – जात नहीं होती इस कविता को पढ़ने वाला उनमें नहीं आता लिखने वाला भी नहीं, इसलिए …


 भूखे की धर्म – जात नहीं होती

Bhookhe ki darm-Jat nhi hoti by Jitendra Kabir

इस कविता को

पढ़ने वाला उनमें नहीं आता

लिखने वाला भी नहीं,

इसलिए शायद

उसके मन की बात नहीं होती,

पेट में अन्न का एक भी दाना

न जाए कई दिनों तक

तो आसान काटना

कोई दिन, कोई भी रात नहीं होती,

रोटी के लिए जितना तरसोगे

उतना ही जान पाओगे कि ‘भूखे’ के लिए 

कोई धर्म, कोई भी जात नहीं होती।

रोटी बनी हो चाहे

किसी दलित के घर में

या हो सेंकी गई किसी सवर्ण के द्वारा,

अनाज किसी हिन्दू ने उपजाया हो

या फिर फसल तैयार करने में

पसीना किसी मुस्लिम, सिख, ईसाई,

पारसी, जैन, बौद्ध ने हो बहाया,

‘भूखे’ के लिए 

किसी के चूल्हे की रोटी हराम नहीं होती,

रोटी के लिए जितना तरसोगे

उतना ही जान पाओगे कि ‘भूखे’ के लिए

बहुत बार कीमती किसी की जान नहीं होती।

                                      जितेन्द्र ‘कबीर’
                                      
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता– उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !

September 22, 2022

कविता- उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !  उस दिन बहुत गहमागहमी थी  जब एक हास्य कलाकार

सोच को संकुचित होने से बचाएं।

September 21, 2022

सोच को संकुचित होने से बचाएं। अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,असीम

मेरी दर्द ए कहानी

September 19, 2022

मेरी दर्द ए कहानी ना हो कभी किसी की भी मेरी तरह जिंदगानीना हो कभी किसी कीमेरी तरह आंखों में

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं

September 17, 2022

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं अपने आपको सहज़ता से जोड़ो सहज़ता में संस्कार उगते हैं सौद्राहता प्रेम वात्सल्य पनपता है

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया

September 17, 2022

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया टेबल के नीचे पैसे लेकर परिवार बढ़ाया कितना भी समेट

कविता-भारतीय संस्कृति में नारी

September 17, 2022

कविता-भारतीय संस्कृति में नारी भारतीय संस्कृति में नारी लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती हैसमय आने पर मां रणचंडी दुर्गा,

PreviousNext

Leave a Comment