Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhookh by Anita Sharma

 भूख भूख की आग से तड़पता है कि भिखारी हाथ फैलाए भीख मांगता। कहीं कचड़े में कोई जीर्ण शीर्ण सा …


 भूख

Bhookh by Anita Sharma

भूख की आग से तड़पता है कि

भिखारी हाथ फैलाए भीख मांगता।

कहीं कचड़े में कोई जीर्ण शीर्ण सा

रोटी उठाकर खा रहा।

**

कहीं सत्ता की भूख बढ़ रही

निरंकुशता की लौ धधक रही ।

बढ़ रहे हैं पेट और जेब भी

भूख के नये रूप रंग भी ।

**

लालच भी मुँह बा रही

घूसखोरी चरम पर बढ़ रही।

कालाबाजारी करने वाले भी

 क्षुधापूरति खुलेआम कर रहे।

**

वहीं कहीं पर ज्ञानी जन भी ।

ज्ञानवर्धक लेख लिख-पढ़ रहे।

ज्ञान की पिपासा ले डूबते किताबों में।

पिपासु चक्षु ज्ञानवर्धन साहित्य ढूंढते।

**

एकान्त शून्य शान्ति में साधुजन

आध्यात्म ध्यान रत दिखे।

संसार से दूर-दूर वे आराध्य को खोजते।

**

है भूख पेट की कहीं तो

कहीं सत्ता की भूख दिख रही।

ज्ञान की पिपासा की भूख बढ़ रही।

वही साधुओं में आध्यात्म की भूख जाग्रत हो रही।

**

भूख की आग से तड़पता  

भिन्न-भिन्न प्राणी है।

चेतना है भिन्न सी,मनःस्थिति भिन्न सी।

**

—–अनिता शर्मा झाँसी

—–मौलिक रचना


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment