Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhedbhav by Anita Sharma

 भेद भाव भेद भाव के रंग रूप में बंटा हुआ संसार है। * एक ईश की संतान सभी हैं। मत …


 भेद भाव

Bhedbhav by Anita Sharma

भेद भाव के रंग रूप में बंटा हुआ संसार है।

*

एक ईश की संतान सभी हैं।

मत भेदभाव दिलों में रखो।

*

छोटा सा जीवन है सबका हिल-मिल खुशी से जी लो ।

*

हंसते-बोलते साथ साथ रह लो।

जाति पांति में बंटकर वैमनस्यता मत बढ़ाओ।

*

रंग भेद या भाव भेद में मत उलझ तकरार बढ़ाओ।

*

न कोई ऊँचा न कोई नीचा।

समभाव मैत्री सुख पाओ।

*

भेदभाव से ऊपर उठकर नव संसार बनाओ।।

—–अनिता शर्मा झाँसी
—–मौलिक रचना


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment