Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhavnaye liye by siddharth pandey

 भावनाएं लिए फिर रहे दर बदर भावनाएं लिए। तुम अपने लिए हम पराये लिए। आदमी आदमी को पहचानता कहाँ अब …


 भावनाएं लिए

Bhavnaye liye by siddharth pandey

फिर रहे दर बदर भावनाएं लिए।

तुम अपने लिए हम पराये लिए।

आदमी आदमी को पहचानता कहाँ

अब बड़े फिर रहे है दुवाएँ लिए।

आदमी आदमी से आदमियत लिए।

काश के अब मिले अच्छी नियत लिए।

वो हो गया है अब गैरों का रहनुमा

फिरता है ऐसी लिक्खी वसीयत लिए।।

चैन रखा कहाँ है जिंदगी में कहीं,

फिर रहे है सिर पे कितनी बलाएं लिए।

फिर रहे दर बदर भावनाएं लिए। 

दे देते हैं वे अक्सर समय का हवाला।

जिसके पास धन है उसका है बोलबाला।

शाम जिंदगी की अपनों के बीच कटती कहाँ,

अनगिनत कमाई शाम को मधुशाला।।

चलते है साथ चेलों के साए लिए। 

फिर रहे दर बदर भावनाएं लिए।।

-सिद्धार्थ पांडेय, भस्मा गोरखपुर


Related Posts

नहीं चाहिए ऐसे दोस्त- डॉ. माध्वी बोरसे!

December 27, 2021

नहीं चाहिए ऐसे दोस्त! दोस्ती का मतलब है, दोस्त को सही राह पर लाना, उनके साथ हंसना, रोना, पढ़ना, और

अभी पूस मनाते हैं.- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 27, 2021

अभी पूस मनाते हैं. किसी नें मुझसे कहा -दिसम्बर जा रहा है, मैंनें कहा- पूस सता रहा है..!!उसनें कहा–जनवरी आएगीहाड़

विद्यालय “स्कूल” हो गये…. -सचिन राणा “हीरो”

December 27, 2021

विद्यालय “स्कूल” हो गये…. नये भारत में विद्यालय जब से स्कूल हो गये… परेशान हैं अभिभावक मगर बच्चे कूल हो

बीती रात हो गई भोर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 27, 2021

बीती रात हो गई भोर अंतर्मन की पूर्ण कामना, बिना तुम्हारे सभी अधूरे,एहसास हमारा अपना है,एकाकीपन जीवन अपना।। सानिध्य तुम्हारा

मर्जी उसकी-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 27, 2021

मर्जी उसकी पंख लगा उड़ने की इच्छा , मानव मन भी कर लेता है ,आशा और जिज्ञासा लेकर ,दूर गगन

परेशान होने की जरूरत नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

परेशान होने की जरूरत नहीं दिन – प्रतिदिन बढ़ती खाद्य पदार्थों की महंगाई से जनता कोजरूरत नहीं है परेशान होने

Leave a Comment