Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhatka pyar by kamal bhansali

 भटका प्यार बदली सी, तेरी सूरत बहुत कुछ कहती इन आँखों में, तस्वीर दूसरे की सजती तेरे गुमशुदा ख्यालों में, …


 भटका प्यार

Bhatka pyar by  kamal bhansali

बदली सी, तेरी सूरत बहुत कुछ कहती

इन आँखों में, तस्वीर दूसरे की सजती

तेरे गुमशुदा ख्यालों में, बेवफाई रहती

मुखरित हुआ, जब भी अनचाहा प्यार, तुम्हारा

सच कहता, दिल विश्वास से कहता, नहीं मेरा

उसांस भर न कहना, सिर्फ अहसास ही है, मेरा

माना स्वल्प जीवन, बहुत सारे अरमान रखता

पर बेरुखी की कंपकंपी से, जिगर ठहर जाता

एक अदृष्यत स्वप्न, पलकों तले छिप सा जाता

सबकुछ समझ कर, सदा दिल मुस्कराता

असहज न हो प्रिय, बेवफाई  में ऐसा होता

क्षण के लिए मन का, समर्पण भटक जाता

प्यार का प्यार ही रहने दो, इसका इम्तहां न दो

समझो कसक प्यार की, सिर्फ जरा विश्वास दो

तौहफा है प्यार, बिन कसम का जुनून बहने दो

कदम भटके, दिल कहीं और तेरा भटके

दिलवर, बेगानी हसरतों के न लगे झटके

लौट आ,  कई तूफानों में कश्ती न अटके

प्रिय, साँझ, सवेरे में कितना कुछ घट बढ़ जाता

उम्मीद, नाउम्मीद से वर्तमान का पन्ना भर जाता

शुकून होता ,भटका प्यार, जब आलिंगन पा जाता

✍️ कमल भंसाली


Related Posts

हम सभी एक समान-डॉ. माध्वी बोरसे

December 10, 2021

हम सभी एक समान! जाति, धर्म से क्यों करते हैं भेदभाव,क्यों नहीं इंसानियत को आजमाओ? हम सभी का रक्त का

आंसू छलके- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

आंसू छलके आंसू भरकर स्वागत करना, बहुत पुरानी परंपरा अपनी,इंतजार लंबी जब होती है ,मन के आंसू छलक आते हैं,।।

राजनीति होनी चाहिए- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

 राजनीति होनी चाहिए राजनीति होनी चाहिए लोगों के बीच आपसी भाईचारा,प्रेम एवं सौहार्द बढ़ाने के लिए,मगर अफसोसराजनीति होती हैउनके बीच

झंडा दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 10, 2021

झंडा दिवस आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है सात दिसंबर उन्नीस सौ उनचास कोये मनाया गया था पहली बारतब से

गीत हमारे- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

गीत हमारे कुछ गीत ऐसे दर्द भरे,गाकर सुना सकता नहीं, पहले मेरे अश्क बहते,दर्द छुपा पाता नहीं ।। दृश्य ऐसे

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

December 10, 2021

आधे अधूरे अरमान अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत इश्क की भी तो थी चाहत गहरी चाहतों में घीरी

1 thought on “Bhatka pyar by kamal bhansali”

Leave a Comment