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Bhatakte naav ka kinara ho tum – kavya

Bhatakte naav ka kinara ho tum – kavya यह काव्य ,कवि C. P. गौतम द्वारा रचित है , कवि C. …


Bhatakte naav ka kinara ho tum – kavya

यह काव्य ,कवि C. P. गौतम द्वारा रचित है , कवि C. P. गौतम काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्र है |


Bhatakte naav ka kinara ho tum – kavya

Bhatakte naav ka kinara ho tum - kavya



भटकते   नाव  का   किनारा  हो  तुम

दुनिया   में   सबसे   प्यारा   हो   तुम


जो बात कर  लें   दिवाना   हो   जाए 

धरा की परी आशमां का तारा हो तुम


चंचल   अदाएं   खूबसूरत    है   रूप 

हसीनों    में  हसीन   सितारा  हो  तुम 


जो  बात   कर  लें  दिवाना  हो   जाए 

धरा  की परी आशमा का तारा हो तुम


समझते समझते जो  कुछ मैं   समझा

दिल   से   साफ    सोच    से    सुन्दर

नटखट    सरारा          हो           तुम 


खुशी जहां भी रहो प्यार सी. पी .मिले 

निर्मल    गंगा    की     धारा हो तुम 


जो  बात   कर  लें  दिवाना  हो   जाए 

धरा  की परी आशमां का तारा हो तुम

धरा  की परी आशमां का तारा हो तुम

दुनिया      मे    सबसे     प्यार हो तुम 

दुनिया    मे     सबसे      प्यार हो तुम 

                           

                        कवि सी. पी. गौतम

bhatkte nav ka kinara ho tum

duniya me sabse pyara ho tum 


jo bat kar le deewana ho jaye

dhra ki pari asman ka taara ho tum


chanchal adaye khubsurat hai roop 

haseeno me haseen sitara ho tum 


jo bat kar le deewana ho jaye

dhra ki pari asman ka taara ho tum


samjhte samjhte jo kuch mai samjha 

dil se saaf soch se sundar

natkhat sharara ho tum 


khushi jahan bhi raho pyar c.p. mile 

nirmal ganga ki dhara ho tum


jo bat kar le deewana ho jaye

dhra ki pari asman ka taara ho tum

dhra ki pari asman ka taara ho tum

duniya me sabse pyara ho tum 

duniya me sabse pyara ho tum 





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