Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bharat varsh by arun kumar shukla

 शीर्षक- भारत वर्ष मस्तक दिव्य हिमालय जिसका, पांव धुले नितसागर इसका। हृदय भाग में बहती है नित , गंगा यमुना …


 शीर्षक- भारत वर्ष

Bharat varsh by arun kumar shukla

मस्तक दिव्य हिमालय जिसका,

पांव धुले नितसागर इसका।

हृदय भाग में बहती है नित ,

गंगा यमुना की धारा।

दुनिया में सबसे प्यारा ,

यह भारत वर्ष हमारा।।……

सुलभ देव जहां जन्म न पाते,

वेद पुराण जिसका यश गाते।

यहां वहां जहां मन्दिर मस्जिद,

और जगह जगह गुरु द्वारा।। दुनिया……

यहां जन्में चाणक्य से ज्ञानी,

सुश्रुत आर्य मिहिर विज्ञानी।

जन्मा चन्द्रगुप्त जिससे था,

सेल्युकस भी हारा।। दुनिया…….

राजस्थान चन्दन सा न्यारा,

सम्मुख जिसके भय भी हारा।

तलवारों में पला बड़ा जो,

राजपूत है सबको प्यारा।

जगत पूज्य हैं यहां की रानी,

धीर वीर पति धर्म गुमानी।

यहां कई ने मान रक्षण में,

अपने तन को जारा।। दुनिया…..

यहां एक है बंग जहां की अद्भुत छवी निराली,

बच्चा बच्चा वीर और चहुं दिस छायी हरियाली।

जन्मा यहां महा अधिनायक ,

वीर सुभाष हमारा।। दुनिया…..

बिस्मिल शेखर औ बटुकेश्वर,

जो भारत के हैं प्राणेश्वर।

धन्य लाजपत भगत खुदी जो,

इसे प्राण से सींच निखारा। दुनिया…..

 -अरुण कुमार शुक्ला 


Related Posts

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

कविता – कोयले की किल्लत

May 6, 2022

कविता -कोयले की किल्लत कोयले नें राजनीतिक माहौल में गर्मी लाई कमीं दूर अपनी आइडिया समस्याएं बतलाईअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ”

May 4, 2022

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ सुकून को संभालना आसान नहीं बड़े नाज़ों से पालती हूँ, ज़ख़्मों के

कविता-आपनो राजस्थान!

May 2, 2022

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों

PreviousNext

Leave a Comment