Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bhaiya dooj by Sudhir Srivastava

 भैयादूज कार्तिक मास शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को भैया दूज होता है, इसी दिन चित्रगुप्त जी का पूजन भी होता …


 भैयादूज

Bhaiya dooj by Sudhir Srivastava

कार्तिक मास शुक्ल पक्ष

द्वितीया तिथि को भैया दूज होता है,

इसी दिन चित्रगुप्त जी का

पूजन भी होता है,

भाई यम और बहन यमुना के 

अद्भुत मिलन का ये पर्व

यम द्वितीया भी कहलाता है।

व्यस्त रहा यम बहुत दिनों से

बहन से न मिल पाया,

जब यम बहन से मिलने आया

तभी से यह दिवस भाई बहन के

मिलन का शुभदिवस 

भैयादूज कहलाया।

मान्यता ये भी है कि

भाई बहनों के घर जाये,

बहन भाई का खुशी खुशी

आदर सत्कार करे,

रोली अक्षत चंदन से टीका करे

आरती उतारे, मिष्ठान खिलाए

सुख समृद्धि की मंगल कामना करे

प्रेम से भोजन कराये

बार बार आने का आग्रह करे।

भाई बहन के पैर छूए

आशीर्वाद ले ही नहीं ,दे भी

मायके आने का आमंत्रण भी दे

मायके में पूर्ववत सम्मान,अधिकार का

पूर्ण विश्वास दिलाए,

माँ बाप की कमी न महसूस होने दे

बहन ही नहीं बेटी की तरह 

दुलार प्यार दे,उपहार दे।

भाई दूज की सार्थकता को

मजबूत आधार दे।

तब भाई ही नहीं बहन का भी

निश्चित कल्याण होगा,

यम और यमुना का आशीर्वाद मिलेगा

दोनों का जीवन खुशहाल होगा।

● सुधीर श्रीवास्तव
       गोण्डा, उ.प्र.
    8115295921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment