बेटियाँ
बिटिया से घर संसार है,
रौनक घर परिवार है।
सबके बीच की अहम् कड़ी।
प्यार और विश्वास की मूरत है।
खूब पढ़ाओ ,सुखी बनाओ।
उज्जवल भविष्य बनाना
मेरी बेटी मेरी दौलत है।
हर सुख इस पर न्योछावर।
सबकी फिक्र हमेशा करती।
सब का मान ध्यान रखती।
प्यारी सी बोली है इसकी।
सबकी आँख का तारा है।
हर धन से बढ़कर धनवान पिता
वही जिसकी प्यारी सी बेटी है।
हर घर की रौनक बिटिया है।
हर घर की धड़कन है।
खिलखिला के हँसती जब बेटी
घर का हर कोना आनंदित रहता।
पापा दिल की बातों को बस
बेटी के सम्मुख ही कह पाते।
कहीं माँ का साया पिता
बेटी में ही तो पाते हैं।
—–अनिता शर्मा झाँसी
——-मौलिक रचना



