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beti par lekh| बेटी पर लेख

मुझे मेरी बेटी पर गर्व है बेटियां मां लक्ष्मी सरस्वती का स्वरूप है आओ समाज में फैली कुरीतियों से बेटियों …


मुझे मेरी बेटी पर गर्व है

beti par lekh| बेटी पर लेख

बेटियां मां लक्ष्मी सरस्वती का स्वरूप है

आओ समाज में फैली कुरीतियों से बेटियों को बचाएं

बेटियों को बचाने समाज में फैली कुरीतियों – बाल विवाह भ्रूण हत्या घरेलू हिंसा दहेज प्रथा और बेटियों से दुष्कर्म के खिलाफ एलान-ए-जंग करनें का संकल्प करें – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – सृष्टि रचनाकर्ता ने धरातल पर मानवीय लिंग स्त्री पुरुष की रचना कर खूबसूरत जीवन और योनियों को आगे बढ़ाने का सृजन किया तो मेरा मानना है धरातल पर भारत ऐसा अग्रणी देश है जहां स्त्रीलिंग का सम्मान सर्वोपरि किया जाने लगा जो हमें वेदो कतेबों ग्रंथों में पढ़ने को मिल रहा है कि बेटियों को मां लक्ष्मी मां सरस्वती मां दुर्गे मां काली सहित अनेक देवी स्वरूपों में देखा पूजा जाता है और पीढ़ी दर पीढ़ी यह सम्मान बढ़ता चला गया। परंतु समय का चक्र कुछ ऐसा चला कि मानवीय बुद्धि में बेटियां बोझ के रूप में विस्तृत होती गई? और विनाश काले विपरीत बुद्धि की ओर पीढ़ियां ऐसा बढ़ती चली गई कि हमारे बड़े बुजुर्गों के अनुसार तब का सतयुग अब के कलयुग में परिवर्तित होते गया और सामाजिक कुरीतियों ने घर करते हुए बाल विवाह कन्या भ्रूण हत्या महिलाओं पर घरेलू हिंसा दहेज प्रथा और अब बेटियों के साथ बढ़ते दुष्कर्म की विस्तृतता बढ़ती चली गई है, जिसपर नियंत्रण कर उसे रोकने के लिए देश के कानून कायदे नियमों में संशोधन करते हुए नए कानूनबनाए गए, बेटियों विरोधी कार्यकलाप पर प्रतिबंध लगाया गया है जिससे अब अपेक्षाकृत स्थिति में सुधार की ओर कदम बढ़ गए हैं। आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आर्टिकल के माध्यम से बेटियों पर चर्चा करेंगे।
साथियों बात अगर हम बेटियों के खास होने की करें तो हम अपनी बेटी को बेटा कह सकते हैं, लेकिन अपने बेटे को कभी बेटी नहीं कहेंगे, यह दर्शाता है कि बेटियां इतनी खास क्यों हैं, एक बेटी का जीवन ज्वलंत यादों से भरा होता है। भले ही उसके पास केवल एक दिल है, पर यह प्यार, करुणा और हर किसी की देखभाल करने की भावना से भरा होता है। परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ उसका रिश्ता अद्वितीय और दोस्ताना होता है| परिपक्व होने पर भी वह दूसरों के प्रति अधिक दयालु, देखभाल और सहानुभूति रखती है| वह माँ-बाप बहुत भाग्यशाली होते हैं जिनके जीवन में एक बेटी होती है। भले ही उसके जन्म के समय लोगों ने बेटी होने के नुकसान के बारे में चेतावनी दी हो, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता रहता है, माँ-बाप को अपनी बेटी पर गर्व होने लगता है। शादी के बाद एक बेटा बदल सकता है, लेकिन एक बेटी हमेशा वही रहती है| वह कभी भी अपने माता-पिता की उपेक्षा नहीं करती है।बेटियां किसी भी परिवार का एक अहम हिस्सा होती हैं| भारत में, बेटियों को देवी लक्ष्मी (धन और समृद्धि की देवता) के रूप में देखा जाता है। प्रत्येक वर्ष बेटियों को विशेष महसूस कराने और अपने जीवन में उनके महत्त्व को समझने-समझाने के लिएराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्थानीय लेवल पर भी प्रतिवर्ष एक दिन बेटी दिवस के रूप में मनाया जाता है।जो बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को पोषण देने का एक बहुत बड़ा अस्त्र है।
साथियों बात अगर हम बेटियों को बचाने समाज में फैली कुरीतियों दुष्कर्म अपराधों की करें तो, भारत में लड़कियों की शिक्षा पर बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है, वर्तमान स्थिति के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर 82 फ़ीसदी की तुलना में महिलाओं की साक्षरता दर लगभग 64 फ़ीसदी है। एक बालिका को शिक्षित करके, हम उसके लिए बड़ा होना और एक सशक्त महिला बनना संभव बना सकते हैं।
लड़कियों का पोषण, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली लड़कियों में कुपोषण, एनीमिया और विटामिन ए की कमी जैसी समस्याएं बहुत गंभीर हैं। कुपोषण के सामान्य कारण पर्याप्त स्वस्थ भोजन और बच्चों की देखभाल की कमी के कारण होते हैं। बाल विवाह, अधिकांश बाल विवाह में कम उम्र की लड़कियां शामिल होती हैं जो गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंधित होती हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व की तीन बाल वधूओं में से प्रत्येक भारत में रह रही है। कानूनी अधिकार और बालिका संरक्षण, पिछले दस वर्षों में निर्दोष लड़कियों के खिलाफ बलात्कार, तेजाब फेंकना, ऑनर किलिंग और जबरन वेश्यावृत्ति जैसे अपराध बढ़े हैं, साथ ही युवा लड़कियों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। 8 साल की बच्ची के कठुआ बलात्कार मामले जैसे कई हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न के मामलों ने बालिका सुरक्षा अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी और देश में सामाजिक सुधार की आवश्यकता है।
साथियों बात अगर हम बेटियों के प्रति भावों की करें तो, वह एक महिला है, वह एक माँ है, वह एक बेटी है, वह एक पत्नी है, वह एक बहन-सम्मान वाली महिला है,कोई लड़की नहीं – तो, ​​कोई माँ नहीं – अंत में कोई जीवन नहीं, एक लड़की, एक शिक्षक, एक किताब, एक कलम दुनिया बदल सकती है। एक बच्ची हमेशा एक डैडी की लड़की और माँ की दुनिया होती है। एक लड़की खुशी लाती है, वह एक लड़के से कम नहीं है। देखभाल, क्योंकि वह इसे निस्वार्थ रूप से करती है। एक लड़की के बिना कल नहीं है। ठंडा मत बनो, लड़कियां सोने से भी ज्यादा कीमती होती हैं बेटियाँ फूल हैं जो हमेशा खिलती हैं।

दो कुलों का की मान होती है बेटियां
पूरे घर की जान होती है बेटियां
घर परिवार आबाद करती है बेटियां
थम जाता संसार अगर ना होती बेटियां

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, मुझे मेरी बेटी पर गर्व है। बेटियां मां लक्ष्मी सरस्वती का स्वरूप है। आओ समाज में फैली कुरीतियों से बेटियों को बचाएं, बेटियों को बचाने समाज में फैली कुरीतियां बाल विवाह भ्रूण हत्या घरेलू हिंसा दहेज प्रथा और बेटियों से दुष्कर्म के खिलाफ एलान-ए-जंग करनें का संकल्प करें

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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