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beshumar pyar kavita by anita sharma jhasi

  बेशुमार प्यार तुम को हम बतलाये कैसे, बेशुमार प्यार हम करते हैं। तुम बिन जीवन जीने का, स्वप्न में …


  बेशुमार प्यार

beshumar pyar kavita by anita sharma jhasi

तुम को हम बतलाये कैसे,

बेशुमार प्यार हम करते हैं।

तुम बिन जीवन जीने का,

स्वप्न में भी न ख्याल आया।

सांसो के हर सरगम में भी,

बेशुमार प्यार हम करते हैं।

तुम्हारे आगोश में आकर ,

हम संवरने लगे हैं।

न मिलने पर कितनी तड़प,

तुमको बतलायें कैसे।

मन के अंतःकरण में सिर्फ,

तुम ही तुम बसते हो।

पाकर बेशुमार प्यार तुम्हारा,

हम निखरने लगें हैं।

–अनिता शर्मा झाँसी

—मौलिक रचना


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