Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Berojgari by dr indu kumari

 बेरोजगारी  बेरोजगारी के मार से  युवा दल बेहाल है।  जितने भी है रोजगार  योजना से नेता गण निहाल है।  जनता …


 बेरोजगारी 

Berojgari by dr indu kumari

बेरोजगारी के मार से 

युवा दल बेहाल है। 

जितने भी है रोजगार 

योजना से नेता गण निहाल है। 

जनता करती त्राही -त्राही 

पेट में पड़ता पाल है 

जर्जर काया वसन विहीन1

ठंड से ठिठुरता हुआ तन 

बरसात में भींगता हुआ मन 

पूस की रात कटती कैसे 

दो जून निकलती कैसे 

जानता है ये निर्धन 

देश के चमचे क्या जाने 

जो भेड़ियों के खाल है 

मगरमच्छी आंसू रोने वाला 

धूप में पकाया बाल है 

स्वार्थ की बू निकलती है 

दोनों की लूटने की चलती चाल है 

टूटे हुए और टूट जाते हैं 

इनके बुने हुए जाल में 

बेरोजगारी की मार ही 

बहुत बड़ी समस्या है 

इससे निपटारे में देखें 

कौन मसीहा आते हैं। 

स्व रचित 

         डॉ.इन्दु कुमारी 

                       हिन्दी विभाग मधेपुरा बिहार 

9431084142


Related Posts

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष

April 27, 2022

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष एक महान नायक! समानता का अधिकार दिलाया,ज्ञान का प्रकाश चमकाया,किया संघर्ष मानवता के अधिकार

स्वयं को पहचाने!

April 27, 2022

स्वयं को पहचाने! चलो आज स्वयं को पहचाने,अपनी कमजोरियों को जाने,जग की आलोचना बहुत की,अब खुद को भी दे, थोड़े

जीवन में द्वंद का समापन!

April 27, 2022

जीवन में द्वंद का समापन! कभी पाऊं खुद को अनजान,तो कभी महान,कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,मुझ में हे अच्छाई या

मोहब्बत का मरहम़ लगा

April 27, 2022

 मोहब्बत का मरहम़ लगा फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है ये दिल तो कायल

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

April 27, 2022

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल

वीणा के सुर खामोश हो रहे

April 27, 2022

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न

PreviousNext

Leave a Comment