Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Beete lamho me jeena, zahar jaise peena

गीत तुम जहाँ भी रहोग़म का साया न होप्यार तुमको मिलेदर्द आया न होइस दीवानें की खुशियाँतुम्हें ही मिलेमाफ करना …


गीत

Beete lamho me jeena, zahar jaise peena
तुम जहाँ भी रहो
ग़म का साया न हो
प्यार तुमको मिले
दर्द आया न हो
इस दीवानें की खुशियाँ
तुम्हें ही मिले
माफ करना मुझे
जो निभाया न हो

बीते लम्हों में जीना
जहर जैसे पीना
फूल सी तेरी यादें
कांटों सा चुभना
उस गली के दीवानें
अब भी हैं हम
हम तुम्हारे रहें
तुम हो न हो

बातों बातों में रुठना
मेरा भी मनाना
गीत ग़ज़लें सुनाकर
तुम्हें जो हसाना
याद मुझको हर पल
सताती रहे
दर्द सीने में मेरे
तुम्हें हो न हो

तुम जहाँ भी रहो
ग़म जहाँ साया न हो
प्यार तुमको मिले
दर्द आया न हो
इस दीवानें की खुशियाँ
तुम्हें ही मिले
माफ करना मुझे
जो निभाया न हो

चन्द्र प्रकाश गौतम
मीरजापुर, उत्तर प्रदेश
Mail- cp8400bhu@gmail.com

tum jahan bhi raho
gum ka shaya na ho
pyar tumko mile
dard aaya na ho
is diwane ki khushiyan
tumhe he mile
is jamane ki khushiyan
tumhe he mile
maf karna mujhe
jo nibhaya na ho

beete lamho me jeeena
zahar jaise peena
phool si teri yadein
kanton sa chubhna
us gali ke diwane
ab bhi hai hum
hum tumhare rahe
tum ho na ho

baton baton me roothna
mera bhi manana
geet gazle sunakar
tumhe jo hasana
yaad mujhko harpal
satati rahe
dard seene me mere
tumhe ho na ho

tum jahan bhi raho
gum ka shaya na ho
pyar tumko mile
dard aaya na ho
is diwane ki khushiyan
tumhe he mile
is jamane ki khushiyan
tumhe he mile
maf karna mujhe


Related Posts

सुख–दुख पर कविता

December 15, 2022

कविता–जिंदगी सुखों और दुखों का ख़ूबसूरत मेल है जिंदगी में उतार-चढ़ाव बस एक ख़ूबसूरत खेल है जिंदगी सुखों और दुखों

विश्वास जो टूटे | vishwas jo toote

December 14, 2022

विश्वास जो टूटे | vishwas jo toote जब कभी रिशतों के दरमियान विश्वास टूट जाता हैवो रिश्ता , रिश्ता नहीं

अंतर्मन को संवारते जा। Antarman ko sanwarte ja

December 14, 2022

अंतर्मन को संवारते जा। जाने वाले को बार-बार रोका नहीं करते,अकेले जीने से डरा नहीं करते,टूट गया जो बर्तन टूटना

मेला तोना , मेला बाबू | kavita- mela tona, mela babu

December 12, 2022

मेला तोना , मेला बाबू देखो-देखो ये क्या हो रहा हैमेला तोना , मेला बाबू तलन(चलन)में युवा खो रहा है।।मेला

व्यंग्य कविता -मासिक शासकीय पगार चौदह हज़ार है

December 12, 2022

 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार की हदें पार है?क्योंकि मेरा वेतन केवल चौदह हज़ार है।पर एक महीनें में मेरा खर्चा लाखों

शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं | shaskeeye thappe wali vastuon ki heraferi karta hun

December 11, 2022

यह कविता अनाज सीमेंट इत्यादि शासकीय अलॉटमेंट वाली वस्तुओंं पर केंद्र या राज्य सरकार के ठप्पे लगे रहते हैं ।परंतु

PreviousNext

Leave a Comment