Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Barsati sawan by antima singh

कविता- बरसाती सावन देखो! बादल व्योमांश में घनघोर घिर उठे हैं, वन मयूरों के पंखों के पोर खिल उठे हैं, …


कविता- बरसाती सावन

Barsati sawan by antima singh

देखो! बादल व्योमांश में घनघोर घिर उठे हैं,

वन मयूरों के पंखों के पोर खिल उठे हैं,

लो आ गया बरसाती सावन का महीना,

हर तरफ निर्जनों के मन विभोर हो उठे हैं।

हैं झींगुरों की झंकारें गूंजती कहीं,

तो कहीं दादुरों के टर्र-टर्र के शोर सो उठे हैं,

कहीं प्रीयतम संग नाच रहा भींग के कोई,

कोई प्रिय-सुध अमिय में डूब सराबोर हो उठे हैं।

कैसी हर्षायी है सब कृषक मंडली,

कहीं पपीहा के पिउ-पिउ के टोह सो उठे हैं,

अंबुद पिला रहे हैं असीमित मधु कलश वारि,

धरा पीती ही जा रही सिथिल सब चोट हो उठे हैं।

धन्यवाद!

                         -अंतिमा सिंह          (स्वरचित,मौलिक एवं अप्रकाशित काव्य)


Related Posts

देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद विभूति सादगी के किया सुशोभित देशऱत्न प्रथम राष्ट्रपति के ऊँचे पद मुस्कान भरी मुखमंडल परअंकुरित न हो सके

बच्चन जी- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

बच्चन जी सत्ताइस नवंबर उन्नीस सौ सात कोकायस्थ कुल में पैदापिता प्रताप नारायण के घरमां सरस्वती देवी की कोख सेप्रतापगढ़

मुर्दा कौन- R.S.meena Indian

December 3, 2021

 कविता   “मुर्दा कौन” मुर्दा वो नहीं जिसे दिखता नहीं। मुर्दा वो हैं जो देख पाता नहीं।। मुर्दा वो नहीं जो

आज फिर देखा चांद- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

आज फिर देखा चांद सुबह से भूखी प्यासी सीडोल रही थी गली गली कोई भी न था राजी देने को

तुम हमारी कामना – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 3, 2021

तुम हमारी कामना संभावना से कौन करता ,कब कहां इनकार है ,प्रेम का परिणाम होगा ,दर्द का अभिशाप अपना।। शालीन

सत्य है क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

सत्य है क्या? सत्य! जैसा सोचा किसी ने, सत्य! जैसा बोला किसी ने, सत्य!जैसा लिखा किसी ने, सत्य!जैसा पढ़ा किसी

Leave a Comment