Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Barsati sawan by antima singh

कविता- बरसाती सावन देखो! बादल व्योमांश में घनघोर घिर उठे हैं, वन मयूरों के पंखों के पोर खिल उठे हैं, …


कविता- बरसाती सावन

Barsati sawan by antima singh

देखो! बादल व्योमांश में घनघोर घिर उठे हैं,

वन मयूरों के पंखों के पोर खिल उठे हैं,

लो आ गया बरसाती सावन का महीना,

हर तरफ निर्जनों के मन विभोर हो उठे हैं।

हैं झींगुरों की झंकारें गूंजती कहीं,

तो कहीं दादुरों के टर्र-टर्र के शोर सो उठे हैं,

कहीं प्रीयतम संग नाच रहा भींग के कोई,

कोई प्रिय-सुध अमिय में डूब सराबोर हो उठे हैं।

कैसी हर्षायी है सब कृषक मंडली,

कहीं पपीहा के पिउ-पिउ के टोह सो उठे हैं,

अंबुद पिला रहे हैं असीमित मधु कलश वारि,

धरा पीती ही जा रही सिथिल सब चोट हो उठे हैं।

धन्यवाद!

                         -अंतिमा सिंह          (स्वरचित,मौलिक एवं अप्रकाशित काव्य)


Related Posts

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

Leave a Comment