Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Barsaat ki ek rat by Anita Sharma

बरसात की एक रात   इक रात अमावस की थी,         बरसता था पानी। रह-रह कर दामिनी …


बरसात की एक रात

Barsaat ki ek rat by Anita Sharma

  इक रात अमावस की थी,

        बरसता था पानी।

रह-रह कर दामिनी भी थी,

        जोरो की कड़कड़ाई।

आकाश में भी काली घनघोर,

         घटायें छाई ।

एकान्त सूनसान मार्ग में पसरा,

         था सन्नाटा ।

तेज थी बारिश न सूझती थी राहें ,

         भयावह गहन रात्रि ।

मन में भय था न कोई ठिकाना।

        थी चाल मद्धम कार बढ़ रही।

बरसात की वो रात हम थे अकेले,

        जंगल से गुजर रहे थे।

न भूलती वो रात हम थे अकेले ,

        घनघोर गर्जना थी ।

सहमे हुए थे भय से और बढ़ रहे थे,

        न थम रही बरसात थी ।

न राह सूझती थी डगर भयावह ,

       मुश्किल में जान आई।

ईश्वर का आसरा था और भरोसा भी,

        मन में प्रार्थना थी ।

जब कुछ थमा था पानी जान में जान आई।।

      बरसात की वो रात हम थे अकेले।।

———अनिता शर्मा झाँसी

——-मौलिक रचना


Related Posts

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

March 4, 2023

भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने

धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं

March 4, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा

हे परमपिता परमेश्वर

March 4, 2023

भावनानी के भाव हे परमपिता परमेश्वर आपके द्वारा दिए इस जीवन में इन मुस्कुराहटों का हम पर एहसान है हर

हे परवरदिगार मेरे मालिक

March 4, 2023

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं

कविता: भारतीय संस्कृति में नारी | bharatiya sanskriti me naari

February 16, 2023

 भावनानी के भाव कविता:भारतीय संस्कृति में नारी  भारतीय संस्कृति में नारी  लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है समय आने

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

February 16, 2023

 भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment