Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Barood par masoom by Anita sharma

बारूद पर मासूम नियति की गति बड़ी निराली देख अचरच होता है। खतरे का न इल्म इन्हें तो बारूद पर …


बारूद पर मासूम

बारूद पर मासूम - अनीता शर्मा

नियति की गति बड़ी निराली

देख अचरच होता है।

खतरे का न इल्म इन्हें तो

बारूद पर जीवन जीते हैं।

     ऐ मासूमियत की उम्र !

     क्यों बारूद के ढेर में?

     खतरो का न भान इन्हें

     रोटी- भूख सवाल बड़ा।

खेलने की उम्र में ये

खतरों से खेल रहे हैं।

किसी के मनोरंजन के लिए

जीवन दाव पर लगा रहे।

      विषमताओं के इस संसार में

      लाचारी बेमोल बिक रही।

      मासूमियत बारूद के ढेर में

      देखो कैसे सुलग रही।

बाल-मजदूरी के कानून की

धज्जियां देखो उड़ रही।

नेताओं की बात खोखली

मासूमो की जान जोखिम में ।

     कब भारतीयता जागेगी?

    कब होगा कानून सुदृढ़ ?

    कब तक बारूदी खेल चलेगा?

    कब मानवता स्वतंत्र विचारो की होगी?

——–अनिता शर्मा (Anita sharma)

झाँसी
——-मौलिक रचना


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment