Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Barish by satish samyak

बारिश हे बारिश  बार बार मत आया कर । जब जब  तुम आती हो  तब बंद हो जाता है  धयाड़ी …


बारिश

Barish by satish samyak

हे बारिश 

बार बार मत आया कर ।

जब जब 

तुम आती हो 

तब

बंद हो जाता है 

धयाड़ी का काम 

लौट आना पड़ता है 

बाबा को 

आधि धयाड़ी से घर ।

टपकने लगी है 

छत 

जो सालों पहले 

पुराने सरकण्डों से बनाई थी ।

और 

भीग जाता है 

आटे का पींपा ।

बदबू मारने लगी है 

कई महीनों

पुरानी धोई हुई गुदड़ी । 

पानी से भर गया है 

पूरा घर । 

उसमें तैर रही है 

बाबा की गांठी हुई चपल ।

अब तो 

जोहड़े की पाल से 

लाई हुई मिट्टी भी 

चिकनी हो चुकी है ।

जो बार बार

पटक देती है मां को ,

जो लगी है 

जापे से उठकर 

घर का पानी बाहर 

निकालने में ।

    

          सतीश सम्यक

       बड़बिराना, नोहर,  राजस्थान

8000636617


Related Posts

नेताजी – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

नेताजी सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गएभारत माँ के भाल, सजा के गएस्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गएलाल थे

सबसे ख़तरनाक जहर- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

सबसे ख़तरनाक जहर वो बहुत अच्छे से जानते हैंकि जहर की कितनी मात्रा रोज देने सेमर जाती हैं एक इंसान

ऐ चाँद- डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

ऐ चाँद लिख रही तेरी दास्तानशीतलता करते प्रदानदागदार वह कहलाते हैंजीवों के हित आते हैंचाँदनी फिर छिटकाते हैंनिशब्द भरी रातों

भारत माता – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

भारत माता भारत जननी तू हो महानतूने जने हो वीर संतानसिर हिमालय की पायीचरणों को धोता सागर हैशेरों की है

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

January 25, 2022

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम

Leave a Comment