Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

banega apna Desh mahan by Jitendra kabir

 बनेगा अपना देश महान कल तक थे जो चोर–बेईमान, वो बन गये हैं रातों–रात ही बड़े शरीफ इंसान, अवसरवादियों को …


 बनेगा अपना देश महान

banega apna Desh mahan by Jitendra kabir


कल तक थे जो चोरबेईमान,

वो बन गये हैं

रातोंरात ही बड़े शरीफ इंसान,

अवसरवादियों को साथ लेकर हम

चले हैं बनाने अपना देश महान।

कल तक थे जो जेलों के मेहमान,

वो बन गये हैं

रातोंरात ही कानून के निगहबान,

अपराधियों को साथ लेकर हम

चले हैं बनाने अपना देश महान।

कल तक थे जो त्याज्य पकवान,

उनसे सजते हैं

अब रोज ही हमारे दस्तरखान,

घुसपैठियों को साथ लेकर हम

चले हैं बनाने अपना देश महान।

कल तक थे जो चमचेदरबान,

वो बन गये हैं

रातोंरात ही सिंहासन की शान,

घरउजाड़ुओं को साथ लेकर हम

चले हैं बनाने अपना देश महान।

                       जितेन्द्रकबीर

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नामजितेन्द्रकबीर

संप्रतिअध्यापक

पताजितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314



Related Posts

dharti saja den by dr indu kumari

June 27, 2021

 धरती सजा दें  आएं हम सब मिलकर  धरती को यूं सजा दें।  पेड़ों की कतारें लगा दें  इस अवनि को

geet sawan barse sakhi by dr indu kumari

June 27, 2021

गीत – सावन बरसे सखी  बरसे रे सखी रिमझिम पनिया  चमकै रे सखी मेघ में बिजुरिया।  छमकत रे सखी गांव

kavita Mukti by virendra pradhan

June 27, 2021

 मुक्ति किसी डांट-डपट से बेपरवाह हो मन चाहता है खेलना मनमफिक़ खेल जो बन्धे न हों बहुत अनुशासन मेँ परे

Chor chhipa baitha hai man me by dr hare krishna mishra

June 27, 2021

 चोर छिपा बैठा है मन में चोर छिपा बैठा है मन में मैं ढूंढ रहा हूं दूसरे तन में, कैसी

Samvedna viheen hm dr hare krishna mishra

June 27, 2021

 संवेदना विहीन हम   संवेदना विहीन हम  बांट पाय दर्द कौन। अनाथ तो बना गया, प्रकृति भी मौन क्यों ? दर्द

Hamare Sanskar by sudhir srivastav

June 27, 2021

 हमारे संस्कार माना कि आधुनिकता का मुलम्मा हम पर चढ़ गया है, हमनें सम्मान करना जैसे भुला सा दिया है।

Leave a Comment